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शहरी निकाय विभाग पर जनता को लूटने का आरोप

ABSLM 22/02/2022 LAXMAN SINGH 


चंडीगढ़। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अशोक बुवानीवाला ने शहरी निकाय विभाग पर जनता को लूटने का आरोप लगाते हुए कालका और पिंजौर क्षेत्रों के निवासियों से सितंबर 2020 में क्षेत्राधिकार परिवर्तन के बावजूद पंचकुला नगर निगम की सीमा में लागू दरों के अनुसार संपत्ति कर नोटिस दिए जाने को गलत बताया है। बुवानीवाला ने कहा कि ये क्षेत्र पहले पंचकुला नगर निगम की सीमा के अंतर्गत आते थे, लेकिन बाद में कालका और पिंजौर के लिए संयुक्त नगर परिषद के गठन की घोषणा के तहत इससे बाहर कर दिया गया था। नगर निगम क्षेत्रों में संपत्ति कर की क्षेत्रवार दरें नगर परिषद क्षेत्रों की तुलना में बहुत अधिक हैं। उदाहरण के लिए, कालका में परेड मोहल्ला के निवासी, जिसके पास 81 वर्ग गज मिश्रित उपयोग की संपत्ति है, को नगर निगम सीमा में लागू दरों के अनुसार वर्ष 2021- 2022 के लिए संपत्ति कर नोटिस दिया गया था। 115.27 वर्ग गज कारपेट एरिया वाले अपने आवासीय भवन के भूतल के लिए उन्हें 75 पैसे प्रति वर्ग गज की दर से 86.45 वार्षिक संपत्ति कर देने को कहा गया है।
उन्होंने कहा कि नगर निगमों (पंचकूला के रूप में ए 2 श्रेणी के शहरों) के तहत क्षेत्रों की दरों के अनुसार, 300 वर्ग गज तक की आवासीय संपत्तियों के भूतल के लिए 75 पैसे प्रति वर्ग गज शुल्क लिया जाता है। यदि उन्हें नगर परिषद की दरों के अनुसार नोटिस दिया जाता, तो उन्हें 50 पैसे प्रति वर्ग गज की दर से 57.63 का भुगतान करना पड़ता। नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के लिए दरों के अनुसार 300 वर्ग गज तक की आवासीय संपत्तियों के भूतल के लिए 50 पैसे प्रति वर्ग गज शुल्क लिया जाता है। अशोक बुवानीवाला ने नगर निकाय पर लोगों को लूटने का आरोप लगाते हुए कहा कि नगर परिषद कालका-पिंजौर, पिछली गलतियों से नहीं सीखी है क्योंकि वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए निवासियों को समान संपत्ति नोटिस दिए गए थे। कालका और पिंजौर को पंचकूला से अलग कर दिया गया था और नगर निगम ने सितंबर 2020 में एक संयुक्त परिषद बनाई गई थी। 
उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों के निवासियों के लिए विकास शुल्क के नाम पर भी पहले 10 गुना से भी अधिक वृद्धि की जा चुकी है। उन्होंने कहा नगर निगमों, आवासीय, औद्योगिक और संस्थागत उपयोग के लिए विकास शुल्क कलेक्टर रेट का 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी प्रकार सभी निकाय संस्थाओं में कमर्शियल के लिए विकास शुल्क कलेेक्टर रेट का 5 प्रतिशत कर दिया गया है। बुवानीवाला ने कहा कि इस फैसले से आम आदमी की कमर टूटने वाली है। उन्होंने कहा कि शहरी नागरिकों पर ये फैसला जबरदस्ती थोपा जा रहा है। 


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