| भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुए एक समारोह में आज (1 जुलाई, 2014) वर्ष 2011 के लिए बुनकरों तथा शिल्पकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार, शिल्प गुरू पुरस्कार तथा संत कबीर पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे स्वदेशी हस्तशिल्प तथा हथकरघे भारतीय जीवन पद्धति का एक भावनात्मक पहलू है। इसकी विस्तृत श्रृंखला राष्ट्र की विविधता तथा अपार सृजनात्मकता को दर्शाती है। इस क्षेत्र ने महिलाओं के सशक्तिकरण, युवा तथा अपंग व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बुनकरों तथा शिल्पकारों का काफी अच्छा प्रतिशत अनुसूचित जाति तथा जनजाति व धार्मिक अल्पसंख्यकों का है। उन्होंने कहा कि हथकरघा तथा हस्तशिल्प क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे परिवारों के लिए न केवल कम निवेश में आय के अवसर प्रदान करता है बल्कि कृषि से इतर भी उनकी आमदनी में ये अनुपूरक आय का एक स्त्रोत है। इस क्षेत्र की सुदृढ़ता के चलते विस्थापन की स्थिति की रोकथाम होने के साथ-साथ परंपरागत आर्थिक संबंधों का वजूद कायम रखने में भी मदद मिलती है। राष्ट्रपति ने कहा कि यद्यपि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस क्षेत्र के व्यापक उत्पादन के आधार के बावजूद इसके विकास में बाधाएं आई हैं। ऋण सुविधा तक उनकी अपर्याप्त पहुंच, बिचौलिओं पर निर्भरता, कच्चे माल की अपर्याप्त उपलब्धता, पुरानी पड़ गई प्रौद्योगिकी तथा बाजारों तक उनकी सीमित पहुंच इस क्षेत्र के लिए हानिकारक रहे हैं। इस क्षेत्र के उत्पादों को सस्ते आयात एवं मशीन निर्मित एवजी वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन घटकों पर तत्काल, सिलसिलेवार एवं विस्तार से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है और हमें क्षमता, दक्षता, डिजाइन और आधारभूत संरचना की ओर ज्यादा ध्यान देना होगा। |
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