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" दिव्यांग_ दिव्य अंग_ दिव्य आत्मा_दिव्य भारत"

Abslm 30-01-2018

हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह विकलांगों को " दिव्यांग " शब्द देकर विकलांगों का मान सम्मान बढ़ाया है, यह भारत का प्रयास पूरे संसार में प्रशंसनीय है। भारत निर्माण में  दिव्यांग शब्द  दिव्यांगों की भूमिका को एक आधार की तरह प्रतीत कराता है।  राष्ट्र निर्माण में दिव्यांग की एक अहम भूमिका है l दिव्यांगो को एक स्तंभ की तरह माना है, जिस पर हमारा देश टिका है l
आज हमारे देश के दिव्यांग लोग हर क्षेत्र में चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, चाहे वह स्वास्थ्य क्षेत्र हो, या न्याय  का क्षेत्र हो हर क्षेत्र में आगे हैं, और देश निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। दिव्यांग खेल के क्षेत्र में भी आगे हैं। शारीरिक और मानसिक रूप से अझम (विकलांग) होते हुए भी दिव्यांग खेल क्षेत्र में, क्रिकेट से लेकर दौड़ हर क्षेत्र में विदेशों में भी अपना योगदान दे रहे हैं और भारत का मान बढ़ा रहे हैं। तैराकी के क्षेत्र में, क्रिकेट, शॉट पुट, जैवलिन कैरम, भाला हर क्षेत्र में दिव्यांग विश्व में भारत का नाम ऊंचा कर रहे हैं l
इसी श्रंखला में आज छत्रसाल स्टेडियम में अस्टवक्र एवं tecnia ने स्पोर्ट्स मीट 2018 का आयोजन किया।   जिसके अंतर्गत दिव्यांगों ने कई सारे खेलों में भाग लिया। जिसमें शॉटपुट, जैवलिन बैडमिंटन, टेबल टेनिस, कैरम, चैस और रेस महत्वपूर्ण थे। व्हीलचेयर पर भी विकलांगों ने रेस में भाग लिया।

मां शक्ति इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन के दिव्यांगो ने भी sports meet 2018  में भाग लिया।  मां की शक्ति एक ऐसी संस्था है जो कि पिछले कई सालों से दिव्यांगों के सर्वांगीण विकास में अपना एक महत्वपूर्ण योगदान निभा रही है। दिव्यांग का जो एक अंग कमजोर होता है तो पकरती (nature) उसके दूसरे अंग की   शक्ति बढा देती  है। और  मां की शक्ति का यह उद्देश्य है, कि दिव्यांगौ की जिस क्षेत्र में उसको महारत हासिल है, उसमें उसके कौशल का कौशल विकास करके उसको अपने पैरों पर खड़ा करती है। और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की सराहना करती हैं। छत्रसाल स्टेडियम में स्पोर्ट्स मीट 2018  में 50 मीटर 100 मीटर एंड 200 मीटर की रेस में मां शक्ति की तरफ से श्री महेश कुमार, श्री सचिन ने गोल्ड मेडल प्राप्त किया। मां शक्ति इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष अनीता गुप्ता एडवोकेट ने भी दौड़ में गोल्ड मेडल लिया।मां शक्ति की तरफ से व्हीलचेयर पर भाग लेने वाली महेश कुमार एवं सपना ने भी गोल्ड मेडल लिए। दिव्यांगों के इस हौसले को सराहते हुए हम भगवान से उनके इंटरनेशनल लेवल पर जीत की  कामना करते हैं। ताकि इसी तरीके से वह इंटरनेशनल लेवल पर भी गोल्ड मेडल लाकर भारत का मान बढ़ाऐ।

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