abslm 8/11/2022 एस• के• मित्तल
सफीदों,धान की झराई का सही रेट दिलवाने की मांग को लेकर मजदूरों ने मंगलवार को सफीदों मंडी में हड़ताल कर दी। इस हड़ताल के कारण मंडी का कार्य प्रभावित हो गया। झरावों की मांग थी कि धान की झराई का सरकारी रेट अधिक है लेकिन आढ़तियों के द्वारा उन्हे रेट कम दिया जा रहा है। मंगलवार को मजदूर सहीं रेट की मांग को लेकर सुबह ही काम छोड़कर हड़ताल पर चले गए और मार्किट कमेटी कार्यालय के बाहर धरना दे दिया। उसके बाद झरावों ने मांगों का एक ज्ञापन मार्किट कमेटी को सौंपा।
मजदूरों के प्रधान सुरेंद्र, नरेश, धारी, मनजीत, सुभाष व संतोष इत्यादि का कहना था कि वे पिछले 20-30 सालों से सफीदों मंडी में झराई का कार्य करते हैं लेकिन आढ़तियों के द्वारा उनके साथ लंबे समय से शोषण किया जा रहा है। सरकार के द्वारा धान की झराई का रेट 4.80 रूपए प्रति बोरी है लेकिन आढ़तियों के द्वारा उन्हे मात्र एक रूपया प्रति बोरी के हिसाब से मजदूरी दी जा रही है। इसके साथ-साथ आढ़ती एक ढेरी को कई-कई बार उनसे साफ करवाते है और मजदूरी एक बार ही मात्र एक रूपया प्रति बोरी के हिसाब से दी जाती है। उनका कहना था कि वे बेहद गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते है और ना उनके पास जमीन है और ना ही जायदाद है तथा मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं। आढ़तियों के द्वारा उनकी मजदूरी भी समय पर नहीं दी जाती। पूरा सीजन खत्म होने के बाद औने-पौने रेटों व बोरियों की गिनती में भी फर्क डालकर उनका हिसाब किया जाता है। मंडी में फसल लाया हुआ किसान तुलाई के दौरान ढेरी को इक्कठा करने के नाम पर उन्हे कुछ धान देते है और उसी को बेचकर अपने परिवार का खर्चा निकाल रहे है। अब तो आढ़तियों ने उन कुछ किलों दानों को भी मंडी से बाहर निकालने से मना कर दिया है और उनके ऊपर बार-बार चोरी का आरोप लगाया जाता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि फसल झराई की सरकार के द्वारा निर्धारित जो दर है उसी के हिसाब से उन्हे मजूदरी मिलनी चाहिए अन्यथा उनकी हड़ताल अनिश्चितकालीन रूप ले लेगी। इस मामले में कच्चा आढ़ती संघ के प्रधान एडवोकेट गोपाल कृष्ण मित्तल का कहना है कि आढ़तियों व मजदूरों का समझौता हो चुका है। मजदूरी को लेकर कोई विवाद नहीं था। विवाद की असली जड़ चुंगी के दाने थे। मंडी व मजदूरों के बीच फैसला हुआ था कि 30 नवंबर तक मजूदर चुंगी के दाने मंडी से बाहर नहीं निकालेंगे लेकिन वे फैसले से पलट गए। जिसके कारण विवाद उत्पन्न हुआ था। वहीं मार्किट कमेटी सचिव जगजीत सिंह कादियान का कहना था कि झराई की मजदूरी को लेकर कोई विवाद नहीं है। सफीदों मंडी में मजदूरों को सरकार द्वारा निर्धारित रेटों पर मजदूरी मिल रही है। विवाद किसान की ढेरी इक्कठा करने के बाद मिलने वाली चुंगी के दोनों को लेकर था। आढ़तियों व मजदूरों के बीच मार्किट कमेटी कार्यालय में बैठकर भाईचारे में समझौता हो चुका है तथा किसी प्रकार का विवाद शेष नहीं है।
फोटो कैप्शन 1.: मार्किट कमेटी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हुए मजदूर।
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