abslm 15/02/2023 एस• के• मित्तल
सफीदों,सफीदों की शिव कालोनी निवासी अंकित सिंगला ने एचसीएस ऑफिसर बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी नियुक्ति अब एक्साईज एण्ड टैक्सेसन आफिसर (ईटीओ)के पद पर हुई है। उसकी इस उपलब्धि पर सिंगला परिवार एवं समूचे सफीदों क्षेत्र में जश्र का माहौल है। अंकित के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। अपने बेटे की इस उपलब्धि पर पिता मा. महेंद्र सिंह व माता गायत्री देवी फूले नहीं समा रहे हैं। बता दें कि इससे पहले अंकित सिंगला का 5 बड़ी-बड़ी नौकरियों में चयन हो चुका है और एचसीएस के रूप में उसका यह छठा चयन है। नवनियुक्त एचसीएस अंकित सिंगला ने इस संवाददाता से बातचीत में बताया कि उसे शुरू से ही पढ़-लिखकर कुछ बनने का जुनून रहा है। उसने इंजीनियरिंग फिजिक्स में आईआईटी दिल्ली से स्नातक किया। उसके बाद उसकी नियुक्ति रक्षा मंत्रालय की अकाऊंट ब्रांच महाराष्ट्रा में ऑडिटर का चयन हुआ। फिर सैंट्रल जीएसटी विभाग गोवा में बतौर इंस्पेक्टर नियुक्ति हुई। वहीं उसका चयन बतौर एडमिस्ट्रेटिव सबोर्डिनेट डीएसएसएसबी सर्विस दिल्ली व यूपीएससी के माध्यम से सीआरपीएफ में अस्सिटेंट कमाण्डेंट को चुका है। फिलहाल वह इंडियन ऑडिट एण्ड अकाऊंट विभाग में अस्सिटेंट ऑडिट आफिसर के तौर कार्य कर रहे थे।
अंकित सिंगला के अनुसार सर्विस के दौरान छुट्टी के दिनों व ड्यूटी के बाद लाईब्रेरी व घर में उन्होंने कड़ी मेहनत करके पढ़ाई की और उसके नतीजे के फलस्वरूप अब उनकी हरियाणा सिविल सर्विस (एचसीएस) के माध्यम से एक्साईज टैक्सेसन आफिसर (ईटीओ)के पर पर नियुक्ति हुई है। अंकित सिंगला का कहना है कि उनकी पढ़ाई का सफर अभी थमा नहीं है। जब तक वे आईएएस ऑफिसर नहीं बन जाते तब तक वे रूकने वाले नहीं है। अंकित कहते हैं कि आज समाज में बहुत सी समस्या है और वे उन समस्याओं को वे नौकरियों में पोस्टिंग के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में रहकर निकटता से देख चुके हैं। बड़े-बड़े शहरों में फलाईओवरों के नीचे अभावग्रस्त जीवन जी रहे गरीबों व जरूरतमंदों की हालत को देखकर उनका मन बेहद दुखी होता है। उनका मानना है कि शिक्षा के माध्यम से ही उत्कृष्ट समाज की परिकल्पना की जा सकती है। जब एक बच्चा जीवन के किसी क्षेत्र में आगे बढ़ता है तो उसका पूरा परिवार आगे बढ़ता है। गरीबों में शिक्षा की लौ जगाने के लिए वे दिल्ली की एक सामाजिक संस्था खोज में शामिल हुए। दिल्ली सरकार के स्कूलों की जब छुट्टी हो जाती थी जब उन स्कूलों के कमरों में हर रोज गरीबों के बच्चों को शिक्षित करने का सिलसिला शुरू किया और उसमें उन्होंने काफी सफलता हासिल की। इस कार्य में संस्था के काफी सदस्य भी जुटे रहते थे। अंकित ने बताया कि वे आईआईटी करने के बाद किसी प्राईवेट कंपनी में जाकर अच्छा पैसा कमा सकते थे लेकिन उन्होंने सरकारी नौकरी का चयन किया ताकि गरीबों की मदद की जा सके। उसका मानना है कि वह आईएएस बनकर सीधे गरीबों व अभाग्रस्त समाज की मदद कर सकता है। अंकित ने बताया कि अब वह इस जॉब में रहकर जैसा भी समय मिलेगा आईएएस की तैयारी करेगा और एक दिन आईएएस ऑफिसर बनकर दिखाएगा।
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