होली आई-मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

 

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मधुमय, मधुऋतु आई 
फाग की रंगीली बहार आई 
हर चेहरे पर नव मुस्कान छाई 
सुखदायी ऋतु आई रे ! आई 
होली आई ।

जनमानस में नूतन उमंग छाई 
सतरंगी लिवास वाली ऋतु आई 
मलय समीर चली सुखदायी 
बागों में कोयल ने टेर लगायी 
होली आई ।

सब नर -नारी मिल प्रीत बड़ाई 
व्यथित हृदय में प्रीतम याद सताई 
बृजगोरी आंसू झड़ी लगाई 
स्नेह मिलन की मधुमय ऋतु आई 
होली आई ।

भॅंवरों ने फूलों को धुन मधुर सुनाई 
वन उपवन में कलियां खिलने को आई
मौसम में चहुंओर मादकता है छाई 
जन-जन ने रंग गुलाल खूब उड़ाई 
होली आई ।




- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाक घर तारोली गूजर, फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश 283111

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