abslm 26/8/2023 एस• के• मित्तल
सफीदों, नगर की श्री एसएस जैन स्थानक में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मधुरवक्ता नवीन चन्द्र महाराज एवं श्रीपाल मुनि महाराज ने कहा कि शरीर स्थूल है और आत्मा चेतन है। चेतना का उपयोग जीव का लक्षण है। बिना आत्मा के ये शरीर गति नहीं कर सकता। शरीर में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो चलने फिरने में मदद करते हैं। अपने कर्मों के कारण आत्मा सुख-दुख सहन करती है और कष्टों को भोगती है। नरक में पड़े-पड़े प्राणी पल-पल रोते हैं। वे सदा यहीं चाहते हैं कि इन दुखों से किसी तरह से छुटा जाए। हमने जिन भावों से कर्म किए हैं, उन कर्मों को भोगे बिना उन कर्मों से छुटा नहीं जा सकता है। उसे नरक में यमदूत लगातार पीड़ा देते रहते हैं। जो कर्म मनुष्य ने बांधे हैं, वह उनसे छूट नहीं सकता लेकिन पुण्य कर्म करने से आत्मा का कल्याण जरूर किया जा सकता है। हमें हमेशा परमार्थ का चिंतन करना चाहिए। समाज में पापाचार बढ़ता जा रहा है जोकि एक चिंतनीय विषय है। इसलिए हमें धर्म ध्यान करते हुए आत्मा का कल्याण करना चाहिए। सत्संग और मुनियों की शरण में जाने से आत्मा पुण्य हो जाती है। उन्होंने कहा कि आत्मा रस, गंध, वर्ण व स्पर्श रहित है। आत्मा अजर-अमर अविनाशी है। आम्त्मा किसी को दिखाई नहीं देती। आत्मा का कोई भेद पा नहीं सकता।
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