abslm 28/12/2023
बलदेव चौधरी क्राइम ब्यूरो चीफ अलवर
उस वक्त मेरी उम्र दस वर्ष की थी में एक देहात गांव में किसान परिवार से ताल्लुक रखता बचपन से ही मुझे अध्यात्म में रुचि थी कही भी साधु सन्यासी देखता उनसे सत्य धर्म और मनुष्य जीवन पर चर्चा करने लग जाता कही बुजुर्ग लोगो का समूह मिलता एक ही सवाल पूछता सत्य धर्म पर चलने के लिए क्या करना चाहिए उत्तर मिलता बड़े होने पर सब समझ में आ जायेगा,आंखो के सामने कुछ भी अपराधिक घटनाएं और भ्रष्टाचार देखता तो अंदर से तिलमिला उठता लेकिन बच्चा था क्या कर सकता था फिर मन में एक संकल्प लिया की अच्छी पढ़ाई लिखाई कर कुछ राष्ट्र हित में काम करूंगा समय का चक्र तेजी से घूमता रहा पांचवी कक्षा पास कर गांव से शहर में पढ़ना शुरू हुआ राष्ट्र भक्ति और ईश्वर भक्ति का अंकुर जन्म से ही मन में पनप रहा था,स्काउटिंग और आर एस एस में शामिल हो गया सपना था फोज में भर्ती होकर देश सेवा करूंगा चाहे विना वेतन के ही करना पड़े दसवीं कक्षा पास कर विषय चुनने की बात आई संस्कृत भाषा को चुनने का विचार आया लेकिन विद्यालय में उपलव्ध ना होने से एक साल इंतजार करना पड़ा और ग्यारवी कक्षा में खेड़ली राजकीय सीनियर सेकंडरी विद्यालय में प्रवेश लिया और संस्कृत साहित्य,हिंदी साहित्य और भूगोल साहित्य को चुना ,मन बहुत प्रसन्न हुआ की संस्कृत पड़ने का सपना साकार हुआ ,अंग्रेजी में भी बहुत दिमाग चलता था गुरुजी दसवीं कक्षा में वाक्य देते तो तुरंत अंग्रेजी में अनुवाद कर डालता लेकिन मन में राष्ट्र भक्ति का पागलपन सोचता की ये अंग्रेजो की भाषा है मेरे देश के दुश्मनों की भाषा, इसको नही पढ़ना है इस विचार धारा को लेकर अंग्रेजी से ध्यान हटाया परिणाम बड़ी मुश्किल से सफलता अंक प्राप्त कर पाया अंग्रेजी विषय में, बारहवी पास कर महाविद्यालय मारारानी श्री जया किशोरी,भरतपुर में पहुंच गया एक तरफ राष्ट्र भक्ति तो दूसरी तरफ अध्यात्म दर्शन की ललक थी ,फोज की खुली भर्ती में जाने का अवसर मिला घर से खेत की मिट्टी का पिट्ठू भरकर दौड़ के मैदान में पहुंच गया सनक सवार थी जन्म भूमि की मिट्टी लेकर दौड़ करूंगा,आर्मी वालो ने ऐसा करने से मना कर दिया घर लौटकर आ गया,पुलिस विभाग में मोका मिला मना कर दिया क्योंकि पुलिस प्रशासन बहुत ही भ्रष्टाचार में लिप्त था जिस भ्रष्टाचार के लिए लड़ाई जारी थी उसी को केसे स्वीकार करता, आर एस एस को भी किन्ही कारणों से छोड़ना पड़ा,संस्कृत साहित्य पड़ते पड़ते गीता उपदेश और श्री मद, भगवत सप्ताह की और अग्रसर हुआ सोचा था कि सेना में भर्ती ना हो सका तो अध्यात्म में जुड़कर सत्य धर्म का प्रचार प्रसार कर राष्ट्र हित करूंगा और देश में अपराध और भ्रष्टाचार को धर्म ग्रंथ ज्ञान उपदेश के माध्यम से समाज सुधार करूंगा ,एक बार कॉलेज के दिनों मे मित्र मंडली के साथ भरतपुर दशहरा मैदान में सभी अपने हाथ पर नाम गुदवा रहे थे मैने भी गुदवाया परंतु नाम के स्थान पर सत्यमेव जयते लिखवाया देखकर सभी ने मेरा मजाक उड़ाया लेकिन मैंने किसी की परवाह नहीं करी ,समय ने करवट ली पिता बीमार रहते विवाह बंधन में बंध गया कालेज में स्नातक को अधूरा छोड़ छाड़ कर घर की जिम्मेदारी स्वीकार कर खेती में लग गया,लेकिन राष्ट्र हित और अध्यात्म विचार ने मन में घर बना लिया था,विवाह के कुछ साल बाद सप्ताह भागवत गीता उपदेश के माध्यम से समाज सुधार का ठेका ले लिया इस काम में आज से पंद्रह साल पहले लाखो रुपए प्रोग्राम में आते एक धेला नही लिया और घर परिवार और रिश्तेदारों की नजर में पागल कहलाने लगा ,खेती भी खुब मन लगाकर करता लेकिन घाटे के अलावा कुछ भी हासिल नही होता ,दान पुण्य का संस्कार बचपन से ही बना हुआ था तो लाखो रुपए का कर्ज होने पर भी दान पुण्य या किसी आर्थिक मदद करने से नही जीझकता ,इस बात को लेकर घर में खुब लड़ाई झगड़ा रहता , लेकिन मेरा एक ही संकल्प का मन में भूत सवार था राष्ट्र सेवा और अध्यात्म दर्शन ,दिन रात समय बदलता गया मेने सिमट कर अपने क्षेत्र वासियों को अपराधिक और भ्रष्टाचार से मुक्त करने का मानस बना लिया था,में जितना सत्य मार्ग पर चलना चाहता अधर्म और अत्याचार ने उतना ही मुझे जकड़ लिया,दुखी होकर जब महा पुरुषो से मार्गदर्शन लिया तो उत्तर मिला भगवान परीक्षा ले रहे हैं,मेरे घर के सामने अवैध शराब की बिक्री होने लगी दिन रात गुंडा गर्दी होने लगी पांच साल के बाद जब अनीति की हद पार हो गई तो गांव के गणमान्य लोगों की पंचायत बुलाई और अवैध शराब को मेरे घर के सामने से हटाने का निवेदन किया तो जवाब मिला की इस को तो बंद नहीं किया जा सकता तू ही तेरे घर मकान को यहां से बेचकर तेरे खेत में घर बना कर रह,फिर एक दिन मेने परेशान होकर आबकारी विभाग को शिकायत करी तो भ्रष्टाचार ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा क्योंकि में भ्रष्टाचार को मिटाना चाहता था और भ्रष्टाचार मुझे मिटाना चाहता था,आबकारी विभाग सी ओ महोदय ने पहले अवैध शराब बिक्री वाले को सूचना कर सावधान कर दिया और फिर मेरे पास गाड़ी लेकर पुलिस प्रशासन के साथ आया और बोला कहा बिकती हैं शराब बताओ कोन बेकता है,उल्टा मुझे ही झूठे इल्जाम में फसाने के चक्कर में था क्योंकि अवैध शराब बिक्री वालो से तो पुलिस कमीशन लेती है उस दुकान से शराब को हटवा दिया गया ताकि मुझे झूठा साबित कर सके और आकर शिकायत दर्ज कराने के बहाने से दोनो बेटे को थाने ले गए ताकि उन पर जूठी धारा लगा कर उनका भविष्य खराब कर दे और में सत्यवादी और समाज सुधारक बनना छोड़ दूं,सत्य ने मेरा थोड़ा सा हाथ पकड़ लिया,मेरे बेटे पांच मिनट में सकुशल वापस लौट कर आ गए,और मेने राष्ट्र का चौथा स्तंभ पत्रकार बन गया,साल भर के अंदर खूब अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ निडर होकर खुलकर लिखा उजागर किया परिमाण एक पैसा किसी से नहीं लिया परिणाम ये हुआ की पुलिस प्रशासन तो पहले से ही चिड़ा हुआ था और दुश्मन बन गया अपराधी और भ्रष्टाचारी लोग भी दुश्मन बन गए ,किसी का सम्मान करना तो बचपन से ही संस्कार और स्वभाव में था लेकिन किसी की चापलूसी करना स्वभाव में शामिल नहीं कर पाया अपने स्वाभिमान के साथ समझोता नही कर पाया ,सालभर के अंदर पत्रकार लाइन में भी खुब धोखा खाया ,कुछ व्यक्तियों ने खुब विश्वासघात किया पत्रकारिता के नाम पर खूब लूटा और में लूटा क्युकी मुझे बहुत जल्दी हर किसी पर भरोसा करने की आदत थी जिसका दुष्परिणाम जिंदगीभर भुगतना पड़ रहा है,और राष्ट्र हित और समाज सुधार की आदत ने एक बार फिर संकट में डाल दिया,जिसमे मुझे भ्रष्टाचारी लोगो द्वारा जूठे इल्जाम में फसाने की कोशिश की गई लेकिन नाकाम रहे,और कुछ ही दिन पूर्व की मुलाकात में मेरे पत्रकार साथी जार संगठन के अलवर जिला अध्यक्ष सुरेंद्र चौहान जार,ने ये साबित कर दिखाया की पत्रकार राष्ट्र का चौथा स्तंभ है और सत्य की राह पर चलते मेरी उस घड़ी में मुझे भ्रष्टाचारी लोगो के चंगुल से मुक्त कराकर मेरे लिए एक मसीहा बनकर आए,में अब जिंदगी के ऐसे मोड़ पर आकर खड़ा हू,जहां एक तरफ मेरा घर परिवार पत्नी बच्चे हैं और दूसरी तरफ मेरे जीवन भर की सत्य मार्ग पर चलने का संकल्प ,में इतना थक चुका हूं मेने जिन गांव वासियों जिन क्षेत्र वासियों के लिए जीवन भर निस्वार्थ भाव से हर तरह से हर क्षेत्र में सहायता और सेवा की राष्ट्र हित में जीवन निकाल दिया आज उसी समाज में में इतना डरा हुआ हूं,मेरा सत्य और ईश्वर से विश्वास डगमगा रहा है मुझे कोई मार्ग दर्शन करने की कृपा करें,क्या कोई मेरे लिए श्री कृष्ण बनकर आयेगा ,या सत्य मेव जयते केवल किताबो में ही पढ़ने को रह जायेगा,

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