सूचना और प्रसारण मंत्री श्री मनीष तिवारी ने आज यहां अपने मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में लेवसन रिपोर्ट और भारत के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता और प्रभाव के बारे में विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान सदस्यों के सामने भारत के संदर्भ में लेवसन रिपोर्ट की प्रासंगिकता और प्रभाव पर आधारित एक प्रस्तुति की गयी।
सदस्यों का स्वागत करते हुए श्री मनीष तिवारी ने कहा कि विगत दो दशकों में मीडिया के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं। भारत और वैश्विक, दोनों संदर्भों में कुछ खास संरचनात्मक विरोधाभास उभर कर सामने आये हैं, जिसकी ओर सार्वजनिक जीवन के समर्पित हितधारकों का ध्यान जाना आवश्यक है। हालांकि मीडिया का क्षेत्र विभिन्न हितों से जुड़ा रहा है, किन्तु एक स्वर्णिम माध्यम की तलाश करना हमेशा एक चुनौती रही है। क्योंकि, इसके बाद ही विभिन्न हितधारकों की चिन्ताओं की ओर ध्यान देना संभव हो सकेगा। श्री तिवारी ने कहा कि समिति में लेवसन रिपोर्ट पर विचार-विमर्श किया जा रहा था ताकि इसमें उठाये गये मुद्दे पर चर्चा की जा सके और भारत के संदर्भ में इसके प्रभावों का विश्लेषण किया जा सके। जबकि सरकार ने हमेशा ही मीडिया के क्षेत्र में ‘स्व-नियमन’ प्रणाली का समर्थन किया है किन्तु हितधारकों के बीच भी यह महसूस किया गया कि स्व-नियमन के लिए एक वैधानिक प्रारूप के बारे में भी विचार किया जाना चाहिए। लेवसन रिपोर्ट एक ऐसे प्रारूप का उदाहरण हैं, जिसे आवश्यक विचार-विमर्श के बाद ब्रिटेन के संदर्भ में तैयार किया गया था। मंत्री महोदय ने कहा कि विश्वभर में ऐसे अन्य प्रारूपों की तुलना करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
बैठक में भाग लेने वाले सदस्यों में डॉ अनूप कुमार साहा, डॉ संजय जायसवाल, श्री शत्रुघ्न सिन्हा, सुश्री राम्या दिव्या स्पंदना, श्री अहमद सईद मलीहाबादी, डॉ बरूण मुखर्जी, श्री भरत कुमार राउत, श्री एमपी अच्युतन, श्री मोहम्मद अदीद और श्री प्यारीमोहन महापात्र शामिल थे।
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