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दिल्ली में कुत्ते मचा रहे हैं आतंक



नई दिल्ली दिल्ली में आवारा कुत्तों व बंदरों की धर पकड़ पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। नगर निगम हर साल हजारों आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके बंध्याकरण का दावा कर रहा है। इसके बावजूद दिल्ली में आवारा कुत्तों व बंदरों का आतंक छाया हुआ है। हालात यह हैं कि रोजाना 60 से 65 लोग कुत्तों के काटने के शिकार हो रहे हैं। पिछले एक साल में आवारा कुत्तों व बंदरों ने 22,237 लोगों को काटा, जिसमें 95 फीसद से अधिक मामले कुत्तों के काटने के हैं। इस साल करीब छह महीने में आवारा कुत्तों के काटने के चलते पांच लोगों की मौत हो चुकी है।

ये आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि दिल्ली की सड़कों पर आवारा कुत्तों व जानवरों का किस कदर आतंक है। नगर निगम आवारा कुत्तों, बंदरों आदि की धरपकड़ के लिए अभियान चलाता है। इसके लिए नगर निगम छह एनजीओ की सेवाएं ले रहा है। नगर निगम कुत्तों को पकड़कर बंध्याकरण कराता है और फिर नियमानुसार उसी इलाके में छोड़ देता है जहां से कुत्ते पकड़े गए थे। यदि नगर निगम के कर्मचारी कुत्ते को पकड़कर एनजीओ को बंध्याकरण के लिए हवाले करते हैं तो उसे हर एक कुत्ते के लिए 408 रुपये भुगतान किया जाता है। यदि कुत्तों को एनजीओ खुद पकड़कर बध्याकरण करता है तो प्रति कुत्ता 445 रुपये की भुगतान की जाती है। नगर निगम का दावा है कि 2013-14 में 27,869 कुत्तों को पकड़कर बंध्याकरण किया गया। इस लिहाज से कम से कम गैर सरकारी संगठनों [एनजीओ] को 1.13 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा नगर निगम पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों व कर्मचारियों पर हर साल करीब सात करोड़ रुपये खर्च करता है। जिनका काम शहर में आवारा पशुओं की धरपकड़ है।

दिल्ली में अभी भी साढ़े पांच लाख कुत्ते मचा रहे आतंक

दिल्ली में अभी भी साढ़े पांच लाख कुत्ते हैं जो सड़कों पर आतंक बचा रहे हैं। उत्तरी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में 2013-14 में 21,437 लोगों को आवारा कुत्तों व बंदरों ने काटा, जिसमें ज्यादातर लोगों को कुत्तों के काटने के शिकार हुए। 

दिल्ली के अस्पतालों में रैबीज के टीके का टोटा
दिल्ली के अस्पतालों में रैबीज के वैक्सीन का टोटा है। इसके चलते मरीज दर-दर भटकते रहते हैं। सफदरजंग अस्पताल में रोजाना 200 से 250 मरीज रैबीज का टीका लेने पहुंचते हैं। ऐसे में टीके कम पड़ जाते हैं। दिल्ली सरकार व नगर निगम के अस्पतालों में टीके की अधिक कमी है।

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