ABSLM 25/02/2015
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), श्री प्रकाश जावडेकर ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी कि तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना, 2011 द्वारा समुद्र तट पर और खाड़ियों सहित ज्वार-भाटा प्रभावित जल निकायों के पास विकास कार्यकलापों का विनियमन किया गया है। तथापि, महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (एमसीजेडएमए) ने सूचित किया है कि नेशनल हाइड्रोग्राफिक ऑफिस (एनएचओ), देहरादून और दूर संवेदी संस्थान (आईआरएस), चेन्नई की रिपोर्टों के अनुसार, माहिम खाड़ी और बैक खाड़ी को ज्वार-भाटा प्रभावित जल निकायों के रूप में चिन्हित किया गया है, जिसे दो विशिष्ट प्लॉट मालिकों के मामलों में मुम्बई उच्च न्यायालय द्वारा भी पुरिपुष्ट किया गया है। एमसीजेडएमए ने सूचित किया है कि उच्च न्यायालय के उपर्युक्त आदेश के विरुद्ध दायर विशेष अनुमति याचिका को उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया है।
मंत्रालय में एनएचओ और आईआरएस की रिपोर्टों की समीक्षा करने हेतु एक अभ्यावेदन प्राप्त हुआ था। सरकार खाड़ी शब्द की विस्तृत व्याख्या करने हेतु इस विषय की जांच करने पर विचार कर रही है।

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