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abslm 23-06-2017
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संचार
मंत्री श्री मनोज सिन्हा ने कहा है कि सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी मोड) में
पासपोर्ट सेवा परियोजना को सफलतापूर्वक लागू करना भारत में पासपोर्ट जारी करने
के इतिहास में मील का पत्थर है। नागरिक सेवा प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया को
नया रूप दिया गया है। उसका मानकीकरण किया गया है और यह प्रक्रिया स्वचालित है।
पासपोर्ट अधिनियम 1967 के 50 वर्ष पूरा होने पर डाक टिकट जारी करते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि देशव्यापी नेटवर्क के जरिये सेवा प्रदान की जारी है। पासपोर्ट जारी करने वाले सभी प्रधिकार, 91 पासपोर्ट सेवा केंद्र को एकीकृत करके यह सेवा प्रदान की जा रही है और विदेशी हितधारकों यानी प्रवासन, पुलिस, भारतीय डाक, इंडिया सिक्योरिटी प्रेस तथा विदेशों के दूतावास और कंसुलेटों को पहुंच प्रदान की जा रही है। श्री सिन्हा ने कहा कि 24 जून, 1968 भारत को इतिहास में मील का पत्थर है। इसी दिन राष्ट्रपति ने पासपोर्ट अधिनियम को स्वीकृति दी थी। पासपोर्ट अधिनियम पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेज तथा भारतीय नागरिकों के भारत से प्रस्थान संबंधी नियमों के लिए कानूनी रूपरेखा प्रदान करता है। संचार मंत्री ने कहा कि बड़े पैमाने पर अपने नागरिकों को पासपोर्ट सेवा प्रदान करने और व्यापक क्षेत्र कवर करने का काम सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय और डाक विभाग नागरिकों की पासपोर्ट संबंधी सेवाओं के लिए देश में मुख्य डाकघरों को डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) के उपयोग पर सहमत हुए हैं। विदेश मंत्रालय और डाक विभाग की इस संयुक्त पाइलट परियोजना का उद्घाटन 25 जनवरी, 2017 को कर्नाटक के मैसूरू और गुजरात के दाहोद में किया गया। श्री सिन्हा ने कहा कि पासपोर्ट पोर्टल के जरिये पासपोर्ट के ऑनलाइन आवेदन करने वालों को समय लेना होगा और निर्धारित डाक घर पासपोर्ट सेवा केंद्र में जाकर पासपोर्ट सेवा केंद्र की तरह औपचारिकता पूरी करनी होगी। दो चरणों में 235 डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र स्थापित किए जायेंगे पहले चरण में 86 और दूसरे चरण में 194 खुलेंगे। पहले चरण के 52 पीओपीएसके चालू कर दिए गए हैं |
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