abslm 19/03/2021 Skmittal सफीदों :
भारतीय किसान यूनियन चढूनी के बैनर तले किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष लीलू राम सिवानामाल, जयप्रकाश, सतनारायण, इंद्रपाल सिंह व विजेंद्र के साथ क्षेत्र के किसानों ने गेहूं की खरीद में भूमि रिकॉर्ड दर्ज करवाने व अन्य अनावश्यक शर्तें हटाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन मार्किट कमेटी सफीदों सचिव अनिल दीक्षित को सौंपा।
ज्ञापन सौंपने आए किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद की सामान्य शर्तें पिछले पांच दशकों से चली आ रही हैं। जबकि अब सरकारी खरीद एजेंसी भारतीय खाद्य निगम गेहूं खरीद में अनावश्यक शर्तें लगा रही है। सरकार की यह शर्त आंदोलनकारी किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है। सरकारी खरीद पर ये नई शर्तें खरीद प्रणाली पर एक बड़ा हमला है। सरकार की यह नई नई शर्तें वास्तव में एमएसपी को खत्म करने के लिए है। नई शर्तों के तहत गेहूं के टूटे हुए दाने की दर 4 से 2 प्रतिशत व नमी की दर 14 से घटाकर 12 प्रतिशत कर दी गई है। अब सरकार ने गेहूं की फसल का भुगतान भूस्वामी को ही किए जाने का फैसला किया है जबकि बहुत से भू-मालिक खुद खेती नहीं करते है और अपनी जमीनों को अनुबंध पर दे देते हैं। इस निर्णय से जो किसान उस अनुबंधित भूमि पर खेती कर रहा है तो वह अपनी फसल की कीमत कैसे प्राप्त कर सकेगा। सरकार का यह निर्णय बहुत ही निंदनीय और तर्कहीन है।
सरकार को चाहिए कि वह इस शर्त को वापिस ले ताकि भूमि पर जोत करने वाले किसानों को ही भुगतान हो पाए। किसानों ने सरकार से मांग की कि गेहूं की खरीद के लिए एफसीआई द्वारा भूमि रिकॉर्ड जमा कराने, भूमि स्वामी को ही भुगतान की शर्तों को रद्द किया जाए तथा नमी वगैरह की प्रतिशता पहले की ही भांति रखी जाए। किसानों ने साफ किया कि अगर सरकार ने ये थोपी गई नई शर्तें नहीं हटाई तो किसानों के चल रहे संघर्ष में एक बड़ा बदलाव आएगा और उसके जो भी परिणाम होंगे उसकी जिम्मेवारी केंद्र सरकार व खरीद एजेंसियों की होगी।


निवेदन :- अगर आपको लगता है की ये लेख किसी के लिए उपयोगी हो सकता है तो आप निसंकोच इसे अपने मित्रो को प्रेषित कर सकते है