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फसल के अवशेष को ना जलाने व उसके प्रबंधन को लेकर एसडीएम ने ली बैठक पराली ना जलाकर अपने आप को पर्यावरण मित्र बनने का परिचय : आईएएस डा. आनंद कुमार शर्मा

abslm 24/09/2021 एस• के• मित्तल :


सफीदों के एसडीएम आईएएस डा. आनंद कुमार शर्मा ने फसल के बचे अवशेषों को नहीं जलाने को लेकर किसानों में जागरूक पैदा करने के लिए पिल्लूखेड़ा के बीडीपीओ आफिस में किसानों की बैठक ली। इस बैठक में पिल्लूखेड़ा खंड के अनेक गांवों के किसान मौजूद थे। बैठक में प्रशासन व किसानों के बीच अवशेष को ना जलाने व उसके प्रबंधन को लेकर खुलकर चर्चा हुई। इस मौके पर किसानों ने एसडीएम को आश्वासन दिया कि वे सरकार की अवशेष प्रबंधन स्कीम को अपनाएंगे तथा खेतों में फसल अवशेष नहीं जलाएंगे। अपने संबोधन में एसडीएम डा. आनंद कुमार शर्मा ने कहा कि धान की फसल की कटाई के बाद किसान फसल अवशेष प्रबंधन स्कीम का लाभ उठाएं। फसल अवशेष जलाने से फसल उत्पादन में काफी अंतर आता है और साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी कमजोर हो जाती है। इससे भूमि में शत्रु कीटों की संख्या बढ़ जाती है और वायु प्रदुषण भी बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में मानव को अनेक प्रकार की बीमारियां होने का अंदेशा बना ही रहता है साथ ही साथ जीव-जन्तुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है तथा पराली जलाने से उठे धुंए से दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे पराली ना जलाकर अपने आप को पर्यावरण मित्र बनने का परिचय देना चाहिए। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति के किसान भी व्यक्तिगत व कस्टम हायरिंग सैंटर श्रेणी में आवेदन कर सकते है। व्यक्तिगत श्रेणी में कृषि यंत्रों को किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसी प्रकार से किसानों की सहकारी समिति, पंजीकृत किसान समिति, एफपीओ तथा पंचायत द्वारा कस्टम हायरिंग सैंटर स्थापित करने पर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। चयन उपरान्त किसान सूचीबद्ध कृषि यंत्र निर्माताओं से मोलभाव करके अपनी पंसद के यंत्र निर्माता से खरीद सकते है। कृषि यंत्रों की सूची विभागीय पोर्टल पर डाल दी गई है। बैठक में किसानों ने अपनी समस्याओं को एसडीएम के सामने रखा जिन पर एसडीएम डा. आनंद कुमार शर्मा ने किसानों को आश्वाशन दिया कि उच्च अधिकारीयों को अवगत करा समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करवाया जाएगा। 


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कृषि विभाग के एसडीओ सत्यवान आर्य ने बताया कि क्षेत्र के रेड जोन के गांव तथा यलो जोन के गांव के इच्छुक किसान ऑनलाईन आवेदन कर सकते है। साथ ही क्षेत्र के सभी गांवों की अनुसूचित जाति के किसान भी व्यक्तिगत एवं कस्टम हायरिंग श्रेणी में आवेदन कर सकते है। इस स्कीम के तहत अनुदान देने के लिए सारी प्रक्रिा का संचालन जिला स्तरीय कमेटी द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जो किसान स्ट्रा बेलर से बेल बनाकर पराली प्रबंधन करना चाहते है उनकों सरकार द्वारा एक हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान उपलब्ध करवाया l इस मौके पर कृषि विभाग के डॉक्टर सुभाष चंद्र ने कहा धान की फसल उगाने वाले किसानों से अपील की है कि वे पराली का प्रयोग पशु चारे के रूप में करें। इसकी बिक्री के लिए बहुत से ठेकेदार भी हैं। धान की पराली बेचकर किसान आय का अतिरिक्त साधन भी अपना सकते है। उन्होंने बताया कि बासमती धान की पराली किसान दो से तीन हजार रूपए प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदकर और इसका तुड़ा बनाकर राजस्थान समेत अन्य राज्यों में चारा बनाकर भेज सकते है जिससे किसान अच्छा-खासा मुनाफा कमा सकते है। इस मौके पर नायब तहसीलदार रामपाल शर्मा, कृषि विभाग के एसडीओ सत्यवान आर्य, कृषि विभाग के डा. सुभाष मौजूद थे। 

फोटो कैशन 3.: किसानों को संबोधित करते हुए एसडीएम डा. आनंद कुमार शर्मा। 

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