AABSLM

हमारी साइट में अपने समाचार सबमिट के लिए संपर्क करें

18वें दीक्षांत एवं पुरस्कार वितरण समारोह

ABSLM  भिवानी, 6 अक्तूबर 2021 

किसी समाज के विकास के लिए जो योगदान बेटियों का हो सकता है, उसका मुकाबला बेटे नहीं कर सकते है। ये उद्गार चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. आरके मित्तल ने आज बतौर मुख्यातिथि आदर्श महिला महाविद्यालय के 18वें दीक्षांत एवं पुरस्कार वितरण समारोह के समापन समारोह का शुभारंभ करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय की बेटियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में जो पुरस्कार प्राप्त किए है इससे पता चलता है कि आदर्श महिला महाविद्यालय नारी सशक्तिकरण की तरफ अग्रसर है। आज पूरा भारतवर्ष बेटियों के दम पर चहुंमुखी विकास कर रहा है और अब देश की रक्षा का दायित्व भी देश की बेटियों ने अपने कंधों पर ले लिया है। किसी भी समाज का उत्थान बेटियों पर निर्भर है। आने वाले वक्त में भारत देष अपने नौजवान प्रतिभाओं के दम पर विश्व पटल पर महाशक्ति बनकर उभर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति के लिए डॉक्टर या इंजीनियर बनने से पहले अच्छा इंसान बनना जरूरी है। दुनिया को बदलने में हमारी युवा पीढ़ी सक्षम है। स्वर्गीय श्री बनारसी दास गुप्त जी व श्री बंसी लाल जी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इन महान विभूतियों ने जीवनभर लड़कियों की शिक्षा के लिए अथक प्रयास किए। हमें भी इसी परम्परा को आगे ले जाते हुए लड़कियों की षिक्षा पर अधिकाधिक जोर देना चाहिए। बेटियां आने वाले नवनिर्मित समाज की सूत्रधार है। इसके साथ ही उन्होंने महाविद्यालय के भवन निर्माण में आ रही समस्याओं के निवारण में भी अपना सहयोग देने के लिए कहा। उन्होंने महाविद्यालय के अत्याधुनिक पुस्तकालय के लिए 11 लाख रूपये की अनुदान राशि देने की घोषणा की।

इससे पूर्व समारोह के प्रथम सत्र में मुख्यातिथि चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. आरके मित्तल ने डिग्री प्राप्त करने वाली छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि आज सूचना और प्रोद्योगिकी के युग में ज्ञान का तेजी से विस्तार हो रहा है। इस बदलते परिपेक्ष में हम सबको सूचना और प्रोद्योगिकी के साथ तालमेल बिठाकर चलने की जरूरत है। अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। प्रो. मित्तल ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जिस सूचना को जानने में हमें सदियां लगती थी वो धीरे-धीरे वर्षों में और अब महज चंद समय में हमें मिल जाती है। आने वाले समय में क्या होगा इसे समझना बहुत मुश्किल है। इसलिए हमें सूचना और प्रोद्योगिकी के हिसाब से ही खुद के कौशल का विकास करना होगा। ये बात आपको पता होनी चाहिए कि आज जो डिग्री आपको मिली है ये केवल औपचारिक है कामयाब होने के लिए आपको अनौपचारिक रूप से एक विद्यार्थी की ही तरह सीखते रहना है। सिखने का काम केवल स्कूल या कॉलेज में नहीं बल्कि हम अपने घर, अपने आस-पड़ोस, अपने रिश्तेदार कही भी किसी भी हालात में कर सकते है और ये बात हमें कोविड की मुश्किल परिस्थितियों ने समझा भी दी है। सीमित साधनों में हमें कैसे जीना है ये अपने आस-पास के वातावरण के साथ जुडक़र ही सिखा जा सकता है। प्रो. मित्तल ने कहा कि हमारी नेशनल एज्युकेशन पॉलिसी 2021 इसी बात को मानती है और डवलेपमेंट विकास को हमारे सामने रखती है। प्रोफेसर आर.के. मित्तल जी ने छात्राओं को पंचकोष के बारे में विस्तारपूर्वक बताया, जिसमें अन्नमय-कोष (साफ-सुथरा भोजन), प्राणमय-कोष (धूम्रपान रहित जीवन), मनमय-कोष (सकारात्मक एवं सही सोच), विज्ञानमय-कोष (मौजूदा दौर के साथ कदमताल), आनन्दमय-कोष (उद्देष्यमूलक जीवन) आदि रहे। उन्होंने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी उर्जावान है, आवश्यकता है अपने मनोबल को दृढ़ बनाए रखने की। स्थितियां कैसी भी हों, लेकिन मनोबल को कभी गिरने न दें, उत्साहपूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वाह करें।
इस अवसर पर प्रशासनिक परीक्षा में 51वां रैंक प्राप्त कर भिवानी को गौरवान्वित करने वाली सुश्री निशा ग्रेवाल को शॉल व स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। निशा ग्रेवाल ने छात्राओं को यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी दी और उन्होंने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। 
प्रात:कालीन सत्र में विशिष्ट-अतिथि वैश्य महाविद्यालय के महासचिव सुरेश गुप्ता ने कहा कि किसी भी शहर की प्रगति शिक्षा व स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाओं से जुड़ी होती है। आज आदर्श महिला महाविद्यालय नारी षिक्षा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है और छात्राओं से कहा कि ’कन डू इट’ की सोच के साथ आगे बढ़े। 
दूसरे सत्र में विशिष्ट अतिथि वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवरत्न गुप्ता ने कहा कि जिस समाज ने हमें जो कुछ भी दिया है, उस समाज के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह करना चाहिए। आदर्श शिक्षा समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि 100 छात्राओं से शुरू हुआ। यह महाविद्यालय आज बुलंदियों को छू रहा है। एक लडक़ी दो घरों को रोशन करती है, इसलिए लड़कियों का शिक्षित होना और भी जरूरी है। 
कार्यक्रम में महाविद्यालय प्रबन्धकारिणी समिति के महासचिव अशोक बुवानीवाला ने प्रात:कालीन सत्र में मुख्य-अतिथि प्रोफेसर मित्तल को धरती से जुड़े हुए व्यक्तित्व की संज्ञा देते हुए कहा कि आज विश्वविद्यालय इन्हीं के दिशानिर्देशन में दिन दोगुनी रात चौगुनी उन्नति कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह महाविद्यालय रूपी पौधा आज वटवृक्ष बनकर अनेक छात्राओं को ज्ञान रूपी फल प्रदान कर रहा है। प्राचार्या डॉ. रजनी राघव ने सभी अतिथि-गण का स्वागत करने के बाद महाविद्यालय का प्रगति विवरण प्रस्तुत किया। जिसमें उन्होंने महाविद्यालय की शैक्षणिक व सांस्कृतिक उपलब्धियाँ बताते हुए कहा कि यह महाविद्यालय न केवल राष्ट्रीय-स्तर पर अपितु अन्तर्राष्ट्रीय-स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
बॉक्स-1
18वां दीक्षान्त समारोह का आगाज माँ शारदे के चरणों में पुष्प अर्पित कर व दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। इसके पश्चात् माँ शारदे की प्रतिमा के सम्मुख सरस्वती वन्दना कर सर्वप्रथम उनसे आशीर्वाद लिया। तदेपरान्त दीक्षान्त-समारोह प्रारम्भ हुआ। दीक्षांत समारोह में महाविद्यालय की कला संकाय की 73, वाणिज्य की 36, विज्ञान की 30, बीसीए की 20 छात्राओं को स्नातक तथा परास्नातक की 26 छात्राओं को उपाधियाँ प्रदान की गई।
बॉक्स-2
सांयकालीन सत्र में शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाली विभिन्न विभागों से जुड़ी लगभग 150 छात्राएं जिनमें निशा गर्ग, कोमल, श्वेता, गरिमा, मानसी, अंतिमा, सिमरन गर्ग, पूजा रानी, रेनू, पवित्रा चौहान, डिंपल, प्रीति, शिखा, दिव्या गोयल, मंजू रानी, वैशाली, सुमन, सौरभ, पिंकी रानी, मोनिका, सिमरन, इन्दु, आशिमा, रिया आदि रही। विषयों से सम्बन्धित 711 शैक्षणिक व 73 सांस्कृतिक उपलब्धियाँ रही, जिनको प्रदेश मंत्री जेपी दलाल द्वारा नकद पुरस्कार व प्रमाण-पत्र देकर छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। 
ये रहे उपस्थित-
कार्यक्रम में महाविद्यालय प्रबंधकारिणी समीति की अध्यक्षा दर्शना गुप्ता, कमलेश चौधरी, प्रीतम अग्रवाल, पवन बुवानीवाला, विजय किशन अग्रवाल, पवन केडिया, सांवरमल गुप्ता, नंद किशोर अग्रवाल, सुंदर लाल अग्रवाल, नौरंग राय गोयल, सविता श्योराण, रीना तनेजा, सरला गर्ग, रचना अरोड़ा, नीता चावला, डॉ. माया यादव, डॉ. कुशल बाला सहित महाविद्यालय का शिक्षक व गैर-शिक्षक वर्ग उपस्थित रहा। समारोह का समापन राष्ट्रीय-गान के बाद सम्पन्न हुआ।

निवेदन :- अगर आपको लगता है की ये लेख किसी के लिए उपयोगी हो सकता है तो आप निसंकोच इसे अपने मित्रो को प्रेषित कर सकते है