ABSKM 14/10/2021 एस• के• मित्तल :
नगर की सामाजिक संस्था वूमेन इरा फाउंडेशन द्वारा डांडिया रास रचाकर दुर्गाष्टमी धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर संस्था की अध्यक्षा गीतांजली कंसल, रूकमनी, सुदेश, निशा, बबीता, ऋतु, मीनाक्षी विशेष रूप से मौजूद थी। कार्यक्रम का शुभारंभ मां भगवती की आरती के साथ हुआ। आरती के उपरांत महिलाओं ने डांडिया रास करके मां दुर्गा को रिझाने का प्रयास किया। इसके बाद महिलाओं द्वारा रैंप वॉक व एकल नृत्यों की प्रस्तुति दी। वहीं महिलाओं ने डांडिया रास के साथ-साथ गरबा भी खेला।
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अपने संबोधन में संस्था की अध्यक्षा गीतांजली कंसल ने कहा कि नवरात्रि के दौरान हर रात डांडिया रास रचाने का प्रचलन है और इसका चलन वृंदावन से शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण के राधा व गोपियों के संग उनके रास से मानी जाती है। उन्होंने कहा कि गरबा एक नृत्य है जो नवरात्रि के दौरान किया जाता है। इसे गरबी, गर्भ या गर्भ दीप के रूप में भी जाना जाता है। गर्भ दीप में गर्भ एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है गर्भ और दीप का मतलब मातृत्व दीपक है। गरबा आमतौर पर एक बड़े दीपक या देवी शक्ति की प्रतिमा के चारों ओर एक चक्र में किया जाता है। दो नृत्य रूपों के बीच मुख्य अंतर यह है कि नृत्य, हाथों और पैरों के साथ किया जाता है, जबकि दांडिया को रंगीन छडिय़ों के साथ खेला जाता है।
फोटो कैप्शन 7.: डांडिया रास में भाग लेती हुई महिलाएं।


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