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भारतीय शिक्षा की पुनर्कल्पना सम्मेलन 16 जुलाई को

abslm 15/07/2022 laxman singh

चंडीगढ़  शिक्षा किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी होती है, इस भावना के साथ आगे बढ़ते हुए जीआईसी (ग्लोबल इंडिया कोलेबोरेटिव) फोरम और ‘कॉलेज विद्या’ संयुक्त रूप से 16 जुलाई 2022 को ली मेरिडियन होटल, जनपथ, नई दिल्ली में एक शिक्षा शिखर ‘‘भारतीय शिक्षा की पुनर्कल्पना सम्मेलन’’, का आयोजन करने जा रहे हैं। ये जानकारी देते हुए जीआईसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने बताया कि यह कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा समर्थित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस शिखर सम्मेलन में भारतीय शिक्षा की पुनर्कल्पना में कई प्रतिष्ठित हस्तियां, जैसे प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, कुलपति, नीति निर्माता, दार्शनिक, विद्वान, सफल व्यवसाय के मालिक आदि, भारतीय शिक्षा की पुनर्कल्पना पर अपने विचार सांझा करेंगे। कुछ प्रमुख वक्ताओं में फिरोज बख्त अहमद (पूर्व कुलाधिपति, मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद), आईएएस टॉपर, इरा सिंघल, जामिया मिलिया इस्लामिया की कुलपति प्रोफेसर नजमा अख्तर और पीटीआई के हिंदी सेवा भाषा के संस्थापक, संपादक व विश्व ख्याति प्राप्त स्तंभकार, डॉ वेद प्रताप वैदिक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जितेंद्र उत्तम आदि शामिल होंगे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि इस शिक्षा शिखर सम्मेलन में हम शिक्षा क्षेत्र में चार सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के लिए चर्चा करेंगे और रणनीति विकसित करेंगे। वे मुद्दें रोजगारपरकता, प्रेरक जिज्ञासा, कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों का निर्माण, और शिक्षा प्रदान करने में विदेशी हस्तक्षेप से प्रेरित होंगे। बुवानीवाला ने कहा कि हम अपनी शिक्षा प्रणाली में उत्कृष्टता की उस भावना को फिर से विकसित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय में श्वेत पत्र प्रस्तुत करेंगे। ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण और मूल्यों को विकसित करने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है जो लोगों को एक समावेशी और स्थायी भविष्य में योगदान करने और लाभान्वित करने में सक्षम बनाती है। भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने और चीन से निर्माताओं के एक बड़े हिस्से को दूर करने के लिए तैयार है, हमारे युवाओं को इस जीवन भर के अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार करने की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए स्कूलों और विश्वविद्यालयों को ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करने की जरूरत है जो ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़ा हो। इसके लिए समग्र दृष्टिकोण की जरूरत है। जीआईसी इस क्षेत्र में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा हमें एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की जरूरत है जहां हम अर्थ, उद्देश्य, रचनात्मकता और संबंध के लिए युवाओं की गहरी जरूरतों को पुरा कर सकें। हम क्रिएटिव एम्पावरमेंट मॉडल में व्यक्तियों, स्कूलों और संगठनों को प्रशिक्षित करके ऐसा कर सकते हैं, जो अनुभवात्मक शिक्षा का एक संयोजन हो, जो एक साथ प्रमुख जीवन कौशल को बढ़ावा दे तथा जो युवाओं को तेजी से बदलती दुनिया में बढऩे में मदद करे।

जीआईसी परिचय -

जीआईसी मात्र जुबानी जमा-खर्च में विश्वास नहीं रखती बल्कि जमीनी सच्चाई से जुड़ी संस्था है। कम्पनीज एक्ट सेक्शन 8 लाभ शून्य संस्थान तथा नीति आयोग के साथ पैनल में शामिल है। एक पहल और मंच जो गहरी सोच पूर्ण निष्ठा और यथार्थ से उपजी परिकल्पना से पूर्ण रूप से प्रेरित होकर भारत को 5 खरब डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद वाली अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए हम 9 क्षेत्रों में काम कर रहे है। ये हैं- उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, न्याय, पर्यावरण, नि:स्वार्थ सेवा, महिला सशक्तिकरण और मीडिया। हम इस लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं की हमारे समाज, संस्कृति और व्यापार में सकारात्कम परिवर्तन और प्रभाव आएं, इसके लिए हमारा प्रयास है कि व्यक्ति, विश्व और व्यवसायिक लाभ के बीच उत्तम समन्वय बनें।

कॉलेज विद्या परिचय -

कॉलेज विद्या भारत का पहला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो सभी विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन एक मंच पर लाता है। यह हर ऑनलाइन पाठ्यक्रम और इस पाठ्यक्रम को प्रदान करने वाले विश्वविद्यालय के बारे में निष्पक्ष जानकारी प्रदान करता है। कॉलेज विद्या के ऑनलाइन पोर्टल का उद्देश्य छात्रों को बिना पक्षपात के ऑनलाइन शिक्षा के हर पहलू के बारे में पूरी जानकारी देना है। यह छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा में सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय प्राप्त करने की शक्ति देता है।


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