abslm 9/11/2022 लक्ष्मण सिंह स्वतंत्र
श्री महाराज जी ने कहां तीर्थ क्षेत्र घोषित होने से श्रृंगवेरपुर धाम कि जहां एक और महिमा और गरिमा में वृद्धि होगी वहीं दूसरी ओर बहुत सारे अनैतिक कार्य जो तीर्थ क्षेत्र में नहीं होने चाहिए वह बंद होंगे और भविष्य में श्रृंगवेरपुर धाम एक बड़े तीर्थ के रूप में परिणित होगा श्री महाराज जी ने कहा प्रभु का कार्य सदैव करते रहना चाहिए जीवन में उसे कभी बंद नहीं होने देना चाहिए जिस स्थल पर प्रभु श्री राम कभी आए थे उस स्थल पर आकर आनंद की अनुभूति हो रही हैl
अखंड भारत की परिकल्पना हमारे ऋषि-मुनियों ने की थी जिस पर वर्तमान सरकार के द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है इससे आने वाले समय मैं समूचे भारत में सनातन धर्म का ध्वजा लहराए गा मनुष्य को अपने जीवन में यदि सुखी रहना है तो उसे प्रभु की शरण में आना ही होगा आज के समय में भी वृक्ष पर्वत नदियां सभी अपना अपना कार्य कर रही हैं किंतु मनुष्य अपने निजी स्वार्थों के कारण साधना आराधना से दूर होता चला जा रहा है जिसे पुनः वापस आकर वेद के सिद्धांतों पर चलने की आवश्यकता है शंकराचार्य जी महाराज ने राष्ट्रीय रामायण मेला के आयोजन की सराहना करते हुए आयोजकों तथा क्षेत्रीय जनों को सफल कार्यक्रम के लिए बधाई भी दिया समारोह की अध्यक्षता करते हुए गऊघाट के संत स्वामी श्री जयराम दास जी महाराज ने श्रृंगवेरपुर धाम और सीताराम नाम संकीर्तन से होने वाले लाभ के बारे में बताया तथा विनोद आनंद सरस्वती विनोद आनंद सरस्वती जी महाराज ने इस अवसर पर श्री राम कथा के माध्यम से प्रकाश डाला आए हुए अतिथियों का स्वागत क्षेत्रीय विधायक श्री गुरु प्रसाद मौर्या राष्ट्रीय रामायण मेला के अध्यक्ष डॉ बालकृष्ण पांडे उपाध्यक्ष जेएन यादव सियाराम सरोज संयुक्त मंत्री अमित द्विवेदी समाजसेवी विनोद ओझा उमेश शुक्ला चंदन प्रतिमा मिश्रा आदि ने किया जबकि संचालन राष्ट्रीय रामायण मेला के महामंत्री उमेश चंद्र द्विवेदी के द्वारा किया गया इस अवसर पर प्रधानाचार्य राजमणि शास्त्री अवध नारायण मिश्रा शैलेंद्र कुमार शुक्ला स्वामी राघव दास आसाम से पधारे जूना अखाड़ा के महंत अनुपम मिश्रा आज के साथ ही सैकड़ों की संख्या में महिलाएं व पुरुष उपस्थित रहे इस अवसर पर राष्ट्रीय रामायण मेला आयोजन समिति द्वारा सभी संत महात्माओं विद्वानों वउपस्थित क्षेत्रीय जनों को विधायक गुरु प्रसाद मौर्या जी के द्वारा श्रृंगवेरपुर धाम का प्रतीक चिन्ह अंगवस्त्रम स्मारिका तथा श्री रामचरितमानस की पुस्तक सम्मान पत्र आदि भेंट कर सभी को सम्मानित किया गया


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