abslm 14/3/2023
-अग्रवाल वैश्य समाज के चार कार्यक्रमों में शिरकत करके दी थी नई दिशा
-बेबाक बोलने वाले डा. वैदिक ने सदा अपनी बात मजबूती से रखी
अशोक बुवानीवाला ने बताया कि वे अग्रवाल वैश्य समाज के चार महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल हुए। वर्ष 2009 में अग्रवाल वैश्य समाज संस्था का उद्घाटन उन्हीं के हाथों कराया गया। पानीपत में लोकसभा स्तर पर वार्षिक समारोह में, हरिद्वार में अग्रवाल वैश्य समाज के प्रशिक्षण शिविर और रेवाड़ी में भारतेंदु अलंकार पत्रकार सम्मान समारोह में उन्होंने शिरकत की थी। वैश्य समाज की राजनीति में भागीदारी पर उन्होंने खूब वक्तव्य दिए। अग्रवाल वैश्य समाज को उनका जाना निजी क्षति है।
उन्होंने कहा कि डॉ. वेदप्रताप वैदिक को उन अग्रदूतों में गिना जाता रहा है, जिन्होंने हिंदी को मौलिक चिंतन की भाषा बनाया। भारतीय भाषाओं को उनका उचित स्थान दिलाने के लिए सदा संघर्ष और त्याग करने का काम किया। महात्मा गांधी, महर्षि दयानंद और डा. राम मनोहर लोहिया की परम्परा को आगे बढ़ाने में डा. वैदिक जी सदा अग्रणी रही। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पीएचडी भी की थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति का शोध ग्रंथ हिंदी में लिखकर अपनी हिंदी के प्रति गहरी सोच, प्रेम को जाहिर किया था। ऐसा करके वे भारत के ऐसे पहले विद्वान बने थे। अपने जीवनकाल में वे हजारों लेख और भाषण लिख चुके थे। वे भारतीय और विदेशी को मिलाकर करीब 200 समाचार पत्रों में अपने जीवन के अंतिम समय तक भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर अपने लेख लिख रहे थे। झीलों की नगरी उदयपुर में उन्होंने देश-दुनिया के मन में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लेकर चल रहे सवालों के जवाब देकर वाहवाही लूटी थी।
डा. वेदप्रताप वैदिक देश के उन चुनिंदा पत्रकारों में से एक थे, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, देश के सियासी हालातों, समसामयिक ज्वलंत विषयों की गहरी समझ थी। उनकी भाषा शैली बेहद सरल व आम आदमी से जुड़ी हुई थी। उनकी निर्भीकता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ साल पहले वे पाकिस्तान में आतंकी सरगना, मुम्बई हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद के घर तक पहुंच गए थे। हाफिज सईद से डा. वैदिक ने कई ऐसे सवाल पूछे जिसे पूछने की आज तक कोई हिम्मत नहीं कर पाया।
डा. वेदप्रताप वैदिक देश के उन चुनिंदा पत्रकारों में से एक थे, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, देश के सियासी हालातों, समसामयिक ज्वलंत विषयों की गहरी समझ थी। उनकी भाषा शैली बेहद सरल व आम आदमी से जुड़ी हुई थी। उनकी निर्भीकता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ साल पहले वे पाकिस्तान में आतंकी सरगना, मुम्बई हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद के घर तक पहुंच गए थे। हाफिज सईद से डा. वैदिक ने कई ऐसे सवाल पूछे जिसे पूछने की आज तक कोई हिम्मत नहीं कर पाया।


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