abslm 9/5/2023 एस• के• मित्तल
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सफीदों, वेदाचार्य दण्डी स्वामी निगमबोध तीर्थ महाराज ने नगर के श्री हरि संकीर्तन भवन में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आजकल भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग जोरदार तरीके से उठ रही है लेकिन कोरी बातों और राजनीति के बल पर भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता। इस देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए लोगों को अपनी पुरातन जड़ों से जुडऩा होगा और धर्म व धार्मिक गं्रथों को आत्मसात करना होगा। देश का हिंदू समाज आधुनिकता की चकाचौंध में धर्म से विमुख होता चला जा रहा है और अपनी पुरातन संस्कृति से दूर हो गया है। धर्म से विमुख होकर हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना नहीं की जा सकती।
दण्डी स्वामी ने कहा कि हर हिंदू को चाहिए कि वह संतों की शरण में जाए और उनके विचारों को सुने और उन्हे अपने जीवन में धारण करें। हर रोज देव मंदिरों में जाकर भगवान के दर्शन करे। बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण करें। वेदों, उपनिषदों, गीता, रामायण सहित अन्य धर्मग्रंथों को पढ़े। शिक्षण संस्थानों में नैतिक व संस्कृत शिक्षा अनिवार्य रूप से लागू करनी होगी क्योंकि भगवान द्वारा दिए गए तमाम ग्रंथ संस्कृत भाषा में है। घर-घर में रामायण, गीता, सुण्दर काण्ड, हनुमान चालीसा के पाठ होने चाहिए। इन सब बातों को अगर हम अंगीकार करेंगे तो हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर को केवल प्रेम के बंधन से बांधा जा सकता है। ईश्वर उन्हीं को प्राप्त होता है जो मन के साफ व दूसरों के प्रति समर्पित होते हैं। इसलिए भक्ति को मन से करें, केवल दिखाने के लिए नहीं। भगवान के श्रीचरणों में स्थान प्राप्त करने के लिए हृदय से स्मरण करने की आवश्यकता है। कहा गया है कि भगवान के श्रीचरणों में ही समस्याओं का हल है। जीवन को सार्थक बनाने के लिए सत्संग से जुडऩा अनिवार्य है।

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