abslm 23/1/2024 बलदेव चौधरी क्राइम ब्यूरो चीफ अलवर
अलवर जिले के कठूमर विधानसभा क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है और खास बात ये है की इनमे गाय और बछड़े की संख्या है जो अधिकतर जनता द्वारा छोड़ी जा रही है जब तक गाय दूध देती हैं तब तक तो उनका पालन पोषण किया जाता है और जब गाय दूध देना बंद कर देती है तो उनको छोड़ दिया जाता है इस तरह से दिन रात छोड़ी गई गाय एवम बछड़े से झुंड के झुंड छुट्टे होकर क्षेत्र में विचरण करते हैं और जिसका दुष्परिणाम ये मिल रहा है की किसान की गेहूं की फसल खाकर सूपड़ा साफ़ हो रही है,
अब बात आती है इनका क्या किया जाए किसान शिकायत करते हैं की शासन प्रशासन कुछ नहीं करता और शासन प्रशासन कहता है की हम इनका क्या करे ,
अगर सरकार द्वारा गौशाला खोली जाती हैं तो गौ शालाओं में भी भ्रष्टाचार की भरमार है वहां पर भी वही हाल है दूध देने वाली गाय को रखा जाता है और बीमार या दूध ना देने की स्तिथि में गाय एवम बछड़े खोलकर छोड़ दिए जाते हैं,
अब सबसे मजे की बात है की जनता एवम शासन प्रशासन दोनो ने एक दूसरे पर दोषारोपण करने में लगे हुए हैं,जबकि आप को बता दे गलती दोनो और से बराबर हो रही है,
जिसमे हानि केवल उन किसानों मजदूरों की हो रही है जो बेचारे बड़ी ही कठनाई से अन्न उगा कर अपना और दूसरे लोगो का पेट भरण पोषण कर रहे है , ऋण लेकर भी इतनी महंगाई में अन्न पैदा कर रहे हैं और जब इन आवारा पशुओं द्वारा एक पल में उनकी तैयार फसल नष्ट कर दी जाती हैं और उनके पास रोने बिलखने के अलावा कोई चारा नहीं है क्योंकि ना तो उनके पास इतनी पॉवर है कि शासन प्रशासन उनकी बात पर विचार करें और ना ही वो आर्थिक रूप से इतने सक्षम है की अपने खेतो की चार दिवारी कर ले और खेत तो खेत होते हैं उनकी दिवारे थोड़े ही होती है
अब ये स्तिथि किसानों और सरकार के मध्य ऐसी बनी हुई है जिसका समाधान शायद ही हो पाए क्योंकि किसी भी समस्या का समाधान तब होता है जब उसका कारण समझ कर साफ सुथरी नियत से समाधान किया जाय,

निवेदन :- अगर आपको लगता है की ये लेख किसी के लिए उपयोगी हो सकता है तो आप निसंकोच इसे अपने मित्रो को प्रेषित कर सकते है