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लेखन के लिए भाषा का ज्ञान होना जरूरी: डा. सुरेखा शर्मा राजकीय महाविद्यालय में एकदिवसीय साहित्यिक सेमिनार आयोजित

 abslm  3/3/2024  एस• के• मित्तल   


सफीदों,  नगर के राजकीय महाविद्यालय में लिटरेरी सोसायटी एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय साहित्यिक सेमीनार का आयोजन किया गया। सेमीनार में बतौर मुख्य वक्ता नीति आयोग भारत सरकार की सलाहकार सदस्य व हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग स्थायी समिति सदस्य डा. सुरेखा शर्मा ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कालेज प्राचार्या डा. तनाशा हुड्डा ने की। अपने व्याख्यान में डा. सुरेखा शर्मा ने  विद्यार्थियों को हिंदी में लेखन कौशल संबंधी बारीकियों से अवगत करवाते हुए कहा कि प्रभावी लेखन के लिए लेखक को भाषा की चिंता और संदेश लिखने की तकनीकों का पर्याप्त ज्ञान होना आवश्यक है। लेखन में परिचित शब्दों का उपयोग करना चाहिए जो हम अधिकांश रोजमर्रा की बातचीत में उपयोग करते हैं। 



इसके साथ-साथ लेखन में छोटे शब्दों का चयन करना चाहिए क्योंकि छोटे शब्द आमतौर पर लंबे शब्दों की तुलना में बेहतर संवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि लेखन के लिए भाषा के ज्ञान की आवश्यकता होती है। वास्तव में, भाषा का हमारा ज्ञान जितना अधिक होगा, हमारे लिखने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। 


राइटिंग क्लियर करने के लिए पैराग्राफिंग भी जरूरी है। अपने संबोधन में प्राचार्या डा. तनासा हुड्डा ने कहा कि डा. सुरेखा शर्मा अब तक 9 पुस्तकें  प्रकाशित करवा चुकी है और निरंतर लेखन के कार्य में संलग्न है। कार्यक्रम के समापन पर डा. सुरेखा शर्मा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर डा. अंजू रानी शर्मा, डा. राजेश, ज्योति कवल, डा. जयविंद्र शास्त्री, मंजू, डा. शील व सरबजीत कौर मौजूद थीं।
 
फोटो कैप्शन 2एसएफडीएम1.: विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डा. सुरेखा शर्मा।
फोटो कैप्शन 2एसएफडीएम2.: मुख्यवक्ता डा. सुरेखा शर्मा को सम्मानित करते हुए प्राचार्या डा. तनाशा हुड्डा व अन्य।

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