महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ ने लोकसभा में आज एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय बालाश्रयों के संचालन हेतु कोई वित्तीय सहायता नहीं देता है। तथापि, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय समेकित बाल संरक्षण स्कीम (आईसीपीएस) नामक एक केंद्रीय प्रायोजित स्कीम चला रहा है जिसके तहत बल गृहों सहित कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों हेतु विभिन्न प्रकार के गृहों की स्थापना एवं रखरखाव के लिए महाराष्ट्र राज्य सहित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
संस्वीकृत एवं जारी की गई निधियों का आमतौर पर उपयोग उसी वर्ष में कर लिया जाता है । तथापि, अव्ययित शेष यदि कोई हो, को आगामी वर्ष के लिए देय अनुदान में समायोजित किया जाता है ।
गृहों में सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने तथा किशोर न्याय (बालको की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 के तहत केंद्रीय मॉडल नियमावली में विनिर्दिष्ट देखरेख के मानकों को बनाए रखने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय समेकित बाल संरक्षण स्कीम (आईसीपीएस) के तहत बाल गृहों सहित विभिन्न प्रकार के गृहों की स्थापना तथा रखरखाव के लिए राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कर रहा है।
इन नियमों में, अन्य बातों के साथ-साथ, भौतिक अवसंरचना, कपड़े, बिस्तर, पोषण एवं आहार के साथ-साथ शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, परामर्श आदि जैसे पुनर्वास उपायों के लिए मानक निर्धारित हैं। राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों से नियमित जांच और निगरानी के माध्यम से उक्त अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार संस्थाओं का चलाया जाना सुनिश्चित करना अपेक्षित है।

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