केन्द्रीय गृहमंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे ने राष्ट्रीय एकता परिषद की 16वीं बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि परिषद की 15वीं बैठक 10 सितम्बर, 2011 को हुई थी और हम दो वर्ष से अधिक समय के बाद फिर मिल रहे हैं। उन्होंने बहुलवादी समाज के मूल्यों को बनाये रखने में राष्ट्रीय एकता परिषद की एक मंच के रूप में सराहना की। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने चिन्ता के तीन महत्वपूर्ण क्षेत्र जहां विभाजनकारी ताकतें हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की अखंडता के लिए खतरा बनी हुई है, पर चर्चा का प्रस्ताव है।
श्री शिन्दे ने कहा कि पहला मुद्दा महिला सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। महिलाएं हमारी आबादी का आधार हिस्सा हैं और देश के विकास में समान भूमिका निभाती हैं। महिलाओं के प्रति जघन्य अपराध बढ़ते जा रहे हैं। भारत सरकार आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन करके महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हमें इस बात पर चर्चा करनी होगी कि समाज द्वारा हुए और कौन से कदम उठाए जाएं जिससे महिलाओं के प्रति भेदभाव और अवमानना मूल कारणों से निपटा जा सके। हमें महिलाओं के प्रति समाज के रवैये में बदलाव लाने की भी जरूरत है।
दूसरा मुद्दा अनुसूचित जाति/जनजाति और उन पर होने वाले अत्याचार से जुड़ा है। एससी/एसटी को वर्षों से अपमान झेलना पड़ रहा है और वे हाशिये पर हैं। संविधान में सकारात्मक व्यवयस्था के बावजूद वे हमारे समाज से नहीं जुड़ पाये हैं। पिछले तीन वर्षों में एससी/एसटी पर हुए अत्याचारों पर मुकदमा चलाने के बारे में भी उदासीन रवैया सामने आया है। तरह-तरह के बहाने अपनाकर उन्हें न्याय से वंचित रखा जाता है। यह मंच एससी/एसटी के विकास में आने वाली अड़चनों के बारे में चर्चा करके उपाय सुझाये कि वे शेष समाज के साथ बराबरी क्यों नहीं कर पाते। उन्हें भी सम्मानित जीवन और राष्ट्रीय विकास में समान साझीदार बनने का हक है।
तीसरा मुद्दा सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता से संबंधित है। पिछले दो वर्षों में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हुई है। पिछले कुछ महीनों की घटनाओं से स्पष्ट है कि इनके पीछे बुरी मंशा है। ऐसा लगता है कि सांप्रदायिक ताकतें मजबूत हुई है और समाज का ध्रुवीकरण करना चाहती है। मामूली सी घटना जो तिल के बराबर होती हैं, ताड़ बना दी जाती है।
मुझे पूरा विश्वास है कि लोगों का एक छोटा समूह हमारे बीच मतभेद पैदा कर रहा है। हमें इनका मुकाबला करना है। हम मंच से आग्रह करेंगे कि इन्हें रोकने के लिए उपाय सुझाएं।
उन्होंने सभी का पुन: स्वागत किया और कहा कि सांप्रदायिक वैमनस्य, लिंग असमानता और समाज के कमजोर तबकों पर हमले के बारे में मंच से महत्वपूर्ण सुझाव आएंगे, जिससे इन मुद्दों से निपटने में मदद मिलेगी।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी, मंत्रिमंडल के सदस्य, संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता, राज्यों के मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय एकता परिषद के सदस्य और विशिष्ट आमंत्रित मौजूद रहे।
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