राज्यसभा में बुधवार को उचित मुआवज़े का अधिकार और भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना में पारदर्शिता विधेयक 2012 पर चर्चा और मतदान कराया जाएगा। यह विधेयक यूपीए सरकार की आम जनता के लिए अधिकारप्राप्त कानून को लागू करने के लक्ष्य की प्रतिबद्धता की एक कड़ी के रूप में लाया जा रहा है। इससे पूर्व, 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून की गलतियों को सुधारते हुए यह विधेयक तीन मुख्य बातों पर आधारित है, जो कि सहमति, मुआवजा और पुनर्वास/पुनर्स्थापना है। लोकसभा पिछले सप्ताह इस विधेयक को 19 के मुकाबले 216 मतों से पारित कर चुकी है। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम रमेश ने विधेयक के पास होने से पहले लोकसभा को आश्वस्त किया कि इसमें राज्य सरकारों के लिए अपनी ज़रूरतों के अनुसार इसे लागू करने काफी गुंजाइश है। विधेयक में किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति के मनमाने और अंधाधुंध अधिग्रहण से बचाने के अधिकार के लिए दूरगामी असर वाले सुरक्षा देने के अभूतपूर्व इंतजाम किए गये हैं।
नये विधेयक में किसानों और भू-स्वामियों को ग्रामीण इलाकों में भूमि अधिग्रहण के बदले बाजार मूल्य से चार गुना तथा शहरी इलाकों में बाजार मूल्य का दोगुना भुगतान करने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक का एक अन्य मुख्य पहलू यह है कि निजी परियोजनाओं के लिए भू-स्वामियों की 80 प्रतिशत सहमति और सार्वजनिक-निजी परियोजनाओं के लिए 70 प्रतिशत सहमति प्राप्त करने की जरूरत होगी। विधेयक के अनुसार सार्वजनिक उद्देश्य में खनन, ढांचागत, रक्षा, विनिर्माण जोन, बंदरगाह, सड़क और सरकार तथा निजी क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा बनाये जाने वाले रेलवे जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
उचित मुआवज़े का अधिकार और भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना में पारदर्शिता विधेयक 2012 के मुख्य बिन्दु
1 सहमति : अधिग्रहण की प्रक्रिया
· नई व्यवस्था के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले अधिसूचना, प्रारंभिकी या अन्य सूचना जारी करने से पूर्व सामाजिक असर का मूल्यांकन किया जाना जरूरी होगा। (सामाजिक असर मूल्यांकन, धारा-4, भाग-2)
· यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बड़े पैमाने पर सूचकांक के दूर दृष्टिगत प्रभाव को मापने और सहमति प्राप्त की जानी होगी। इसमें एक इलाकें के परिवारों पर पड़ने वाले सामाजिक आर्थिक प्रभाव से लेकर विकल्पों की मौजूदगी और अधिग्रहण के परिणामस्वरूप हुई आजीविका की हानि तक सभी कारकों पर विचार और उन्हें रिकॉर्ड किया जाएगा। इसमें जनता की सभी मामलों पर राय जानने के लिए अनिवार्य रूप से जन सुनवाई शामिल है जिसका उद्देश्य सामाजिक असर मूल्यांकन में निहित है।
· इस मूल्यांकन की फिर एक बाहर के विशेषज्ञों वाले विशेषज्ञ दल द्वारा जांच की जाएगी जिनमें दो गैर-सरकारी, सामाजिक वैज्ञानिक पुनर्वास के बारे में दो विशेषज्ञ तथा परियोजना से संबंधित विषय पर एक तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होगा।
· सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के पक्ष में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद उन 80 प्रतिशत लोगों की सहमति लेनी जरूरी होगी जिनकी भूमि अधिग्रहित की जानी है। इसके लिए एक प्रारंभिक अधिसूचना जारी की जाएगी। यदि सामाजिक असर मूल्यांकन की प्रक्रिया के 12 महीने के भीतर प्रारंभिक अधिसूचना जारी नहीं की जाती तो सामाजिक असर मूल्यांकन की मियाद समाप्त समझी जाएगी और फिर से मूल्यांकन कराना होगा।
· केवल अत्यावश्यक धारा जारी करने की सूरत में ही सामाजिक असर मूल्यांकन को नजरअंदाज किया जा सकेगा।
2 मुआवजा
· नये कानून के तहत मुआवजे में काफी वृद्धि की गई है। एक ऐसा फार्मूला तैयार किया गया है जिसमें भूमि और संपत्ति के बदलते मूल्यों के संदर्भ में बार-बार परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
· क्षेत्र की भूमि के पिछले कुछ वर्षों में रहे बाजार मूल्य को दो से गुणा करके 100 प्रतिशत बढ़ाया जाएगा ताकि भू-स्वामी को नुकसान न हो।
· शहरी क्षेत्र के मामले में भूमि का मूल्य वास्तविक बाजार मूल्य से करीब दोगुना रखा जाएगा।
3. पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना
पुनर्वास और पुनर्स्थापना के विषय पर अधिनियम में नए प्रावधान किए गए हैं और उन्हें नई अनुसूची सहित भू-अधिग्रहण से जोड़ा गया है। नई अनुसूची में उत्पन्न विभिन्न स्वामित्व (दूसरी अनुसूची) दिए गए हैं। इनमें से कुछ लाभ इस प्रकार हैं -
· सभी प्रभावित परिवारों के लिए आवास : सभी प्रभावित परिवारों को आवास पाने का अधिकार होगा, बशर्ते कि वे संबंधित क्षेत्र में पांच वर्ष या उससे अधिक समय से रहते हों और विस्थापित हुए हों। यदि वे आवास नहीं लेना चाहते तो उसके बदले उन्हें एक मुश्त वित्तीय सहायता दी जाएगी।
· एक मुश्त धनराशि या रोजगार का विकल्प : सभी प्रभावित परिवारों को एक मुश्त धनराशि या रोजगार का विकल्प दिया जा रहा है। यदि रोजगार उपलव्ध नहीं हो रहा है तो उन्हें प्रति परिवार पांच लाख रुपये की एक मुश्त सहायता राशि दी जाएगी। वैकल्पिक तौर पर ऐसे प्रत्येक परिवार को 20 वर्षों के लिए दो हजार रुपया प्रतिमाह वार्षिक वृत्ति दी जाएगी, जो महंगाई के अनुरूप होगी।
· आजीविका भत्ता : विस्थापित होने वाले सभी प्रभावित परिवारों को अधिनिर्णय की तारीख से एक वर्ष के लिए प्रतिमाह तीन हजार रुपये का आजीविका भत्ता दिया जाएगा।
· प्रशिक्षिण एवं कौशल विकास : सभी प्रभावित परिवारों को रोजगार प्रदान करने के साथ-साथ प्रशिक्षिण और कौशल विकास भी प्रदान किया जाएगा।
· विभिन्न राशियां : सभी प्रभावित परिवारों को कई तरह के मौद्रिक लाभ जैसे 50 हजार रुपये का यातायात भत्ता और 50 हजार रुपये का पुनर्स्थापना भत्ता दिए जा रहे हैं।
· एक मुश्त वित्तीय सहायता : दस्तकारों, छोटे व्यापारियों या अपना रोजगार करने वाले व्यक्तियों के प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक मुश्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस रकम का निर्णय अधिसूचना द्वारा सरकार तय करेगी जो न्यूनतम 25 हजार रुपये होगा।
· सिंचाई परियोजनाओं के लिए पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना का पूरा होना : सिंचाई या पन-बिजली परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले में प्रस्तावित जमीन के डूब क्षेत्र में आने के छह महीने से पहले पुनर्वास और पुनर्स्थापना का काम पूरा कर लिया जाएगा।
· अधिनियम की शर्तों के पूरा होने पर कब्जा : जिलाधिकारी उसी समय जमीन को कब्जे में लेगा जब प्रभावित व्यक्तियों को क्षतिपूर्ति का पूरा भुगतान हो जाए और उनका पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना पूरी हो जाए। अधिनिर्णय लागू होने की तारीख से क्षतिपूर्ति तीन महीने की अवधि के अंदर और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना के नकदी हिस्से के रूप में क्षतिपूर्ति छह महीने के अंदर प्रदान कर दी जाए। बहरहाल, जब तक वैकल्पिक पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना क्षेत्र कब्जे के लिए तैयार नहीं हो गया है, तब तक परिवारों को विस्थापित नहीं किया जाएगा।
· पुनवार्स एवं पुनर्स्थापना अधिकार के प्रावधानों की समयसीमा : संरचना संबंधी दूसरी और तीसरी अनुसूची में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना के अंशों को अधिनिर्णय की तारीख से 18 महीने की अवधि के अंदर प्रदान कर दिया जाएगा।
· नए विधेयक के अंतर्गत पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना प्रशासक का नवनिर्मित कार्यालय पहले पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना योजना तैयार करेगा : परियोजना स्तर (धारा 41 अंतर्गत गठित) पर पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना समिति को प्रशासक योजना का जो मसौदा (धारा 17-18) प्रदान करेगा, जिलाधिकारी उसकी समीक्षा करेगा। यह काम भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के साथ-साथ चलेगा और उसके लिए अलग से सुनवाई की जाएगी। पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना योजना मंजूर हो जाने के बाद जिलाधिकारी पुनर्वास एवं पुनस्थापना अधिनिर्णय (धारा 30) जारी करेगा।
· अधिग्रहण प्राधिकार को विस्थापन क्षेत्र में विभिन्न संरचना सुविधाओं (धारा 31 और तीसरी अनुसूची) के प्रावधान को भी सुनिश्चित करना होगा। इन विस्थापन क्षेत्रों में विस्थापित और प्रभावित परिवारों को बसाया जाएगा। सुविधाओं में स्कूल, सड़कें, चिकित्सा केन्द्र, डाकघर आदि शामिल हैं।
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