उप-राष्ट्रपति श्री एम हामिद अंसारी ने कहा कि जैसा कि इब्न खलदून ने कहा था ''चीजें ऐसी कैसे और क्यों हैं'' और ''परंपरा के किसी अंधविश्वास से अपना पल्ला झाड़ना'' , वैसा ही प्रो. के. एन. पन्निकर ने पाठकों को बताने की कोशिश की है। बौद्धिक इतिहास उनके कार्य का रूचिकर क्षेत्र है जिसे वे इतिहास की सामाजिक और संस्कृति के दोराहे पर पाते हैं और चेतनता के बदलाव के दौर में संस्कृति का महत्व उनका केंद्रबिंदु रहा है। केरल की राजधानी तिरूवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रो. के¬ एन पन्निकर की ''हिस्ट्री एज ए साईट ऑफ स्ट्रगल'' नामक पुस्तक के विमोचन के बाद अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि जिस प्रकार प्रो.¬पन्निकर ने बौद्धिक गैर-उपनिवेशन पर जोर दिया है, हमारे आजकल के कामकाज में उसे हम अक्सर असुविधाजनक पाते हैं। इसके बावजूद भी हम उसकी उपेक्षा नहीं कर सकते हैं।
उप राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि पुस्तक का यह खंड उन दस्तावेजों और लेखों का एक संग्रह है जिसे प्रो.¬ पन्निकर ने कई वर्षों में लिखा है।
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