आर्थिक मामलों की केबिनेट समिति ने दिल्ली में कस्तूरबा गांधी मार्ग पर राष्ट्रीय कर मुख्यालय राजस्व भवन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस पर 485.16 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत आएगी जिसे साढ़े तीन साल में जारी किया जाएगा और परियोजना के पूरी होने के बाद सालाना खर्च के रूप में 15 करोड़ रूपये दिए जाएंगे।
राजस्व भवन का निर्माण 5.65 एकड़ जमीन पर किया जाएगा जिसका उद्देश्य नार्थ ब्लॉक पर बढ़ते दबाव को कम करना और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड एवं केंद्रीय सीमा एवं उत्पाद शुल्क बोर्ड को एक ही छत के नीचे लाना है। दोनों बोर्ड कर नीतियों पर सरकार को सुझाव देने के अलावा अपने अधीन क्षेत्रीय कार्यालयों के संपूर्ण प्रशासन के लिए जिम्मेदार होते हैं। दोनों बोर्ड भारत सरकार के लिए सबसे बड़े राजस्व संग्राहक हैं। साल-दर-साल राजस्व संग्रहण में बढ़ोतरी की वजह से निदेशालयों का विस्तार हुआ है और बोर्ड के तहत कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में इन कार्यालयों के लिए नॉर्थ ब्लॉक की जगह कम पड़ गई है। इसलिए दोनों बोर्डों और संबंधित कार्यालयों को साथ लाने से बोर्ड की कार्य क्षमता बढ़ेगी और कर प्रशासन में उसकी दक्षता और अधिक प्रभावी होगी।
राजस्व भवन के निर्माण की जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय की अनुमति मिलने और शहरी विकास मंत्रालय से अनापत्ति प्रणामपत्र मिलने के बाद 2008 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को दी गई। 2010-2011 में राष्ट्रीय स्तर पर एक वास्तुशिल्पीय डिज़ाइन प्रतियोगिता आयोजित कराई गई जिसमें शामिल 58 कंपनियों में से विस्तार आर्किटेक्ट्स एंड प्लानर्स, मुंबई को विजेता चुना गया और राजस्व भवन के लिए उसे वास्तुशिल्पीय सेवाओं की जिम्मेदारी दी गई।
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