नई दिल्ली। द्वारा स्थापित एक खुफिया इकाई के जम्मू कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार को गिराने का प्रयास करने के लिए गुप्त धन का दुरूपयोग करने के आरोपों को लेकर आज बड़ा विवाद हो गया। केंद ने वादा कि अगर कोई सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी इसमें संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गुप्त सैन्य रिपोर्ट में विवादास्पद तकनीकी सेवा संभाग ःटीएसडीः के अनधिकृत अभियानों और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए जाने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। एक केंदीय मंत्री ने नाम न लेने की शर्त पर कहा कि अति संवेदनशील मामले की सीबीआई जांच से इंकार नहीं किया जा सकता।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वह सावधानी से जांच के बाद टीएसडी पर सेना की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने के बारे में फैसला करेगी। साथ ही उसने कहा कि इस तरह की किसी अवांछित गतिविधियों को रोकने के लिए उसने कदम उ"ाए हैं। मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा कि रिपोर्ट `राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर अतिक्रमण' है। हालांकि, मंत्रालय ने कहा कि उसने सीबीआई जांच के संबंध में अब तक कोई फैसला नहीं किया है। भाजपा ने रिपोर्ट के समय पर सवाल खड़ा किया और दावा किया कि सिंह को पांच दिन पहले रेवाड़ी में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के साथ मंच साझा करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। यह रिपोर्ट महानिदेशक ःसैन्य अभियानः लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया ने सेना प्रमुख बिक्रम सिंह द्वारा ग"ित बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स इन्क्वायरी के हिस्से के तौर पर की है। सेना प्रमुख ने बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स इन्क्वायरी का ग"न अपने पूर्ववर्ती के कार्यकाल के दौरान स्थापित शीर्ष खुफिया इकाई के कामकाज की समीक्षा के लिए किया था। रक्षा मंत्रालय को इस साल मार्च में सौंपी गई रिपोर्ट में समझा जाता है कि सीबीआई जैसी बाह्य एजेंसी से जांच कराने की अनुशंसा की गई है। संभावित सीबीआई जांच की बात करने वाले केंदीय मंत्री ने रिपोर्ट का गंभीरता से संज्ञान लिया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि रिपोर्ट में शामिल तथ्य बेहद संवेदनशील हैं और अगर कोई सेवानिवृत्त या सेवारत व्यक्ति मामले में शामिल पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, ``समाचार पत्र में उल्लिखित रिपोर्ट की सामग्री सरकार के सक्रिय विचार-विमर्श के दायरे में है। अगर कोई सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी कदाचार में शामिल पाया गया तो उचित कार्रवाई शुरू की जाएगी।''
जम्मू कश्मीर में राजनैतिक तापमान बढ़ गया है। सत्तारूढ़ नेशनल कान्फेंस समेत विभिन्न दलों ने राज्य के मंत्री गुलाम हसन मीर की भूमिका की विस्तृत जांच की मांग की है। उनका नाम रिपोर्ट में शामिल है जिन्होंने उमर सरकार को गिराने के लिए टीएसडी इकाई से कथित तौर पर धन हासिल किया था। मीर फिलहाल उमर सरकार में कृषि मंत्री हैं। उन्होंने इन खबरों को `सरासर झू"' बताया। सेना के दस्तावेज को उद्धृत करते हुए एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल सिंह ने कथित तौर पर उमर सरकार को अस्थिर करने, शीर्ष सैन्य अधिकारी के उत्तराधिकार के क्रम में बदलाव का प्रयास करने के लिए एक एनजीओ को धन देकर, बातचीत पकड़ने वाले उपकरण पकड़ने और अनधिकृत तौर पर छिपा हुआ अभियान चलाने के लिए खुफिया सेवा कोष का दुरूपयोग किया।
सेवानिवृत्त सेना प्रमुख और इस मामले में शामिल उनकी टीम पर संभावित कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर तिवारी ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष का सवाल नहीं है बल्कि यह सुनियोजित एवं ढांचागत मुद्दा है, ``जहां कथित कार्य ऐसा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के वृहद दायरे में आता है।''
तिवारी ने कहा कि सरकार इन बातों को काफी गंभीरता से लेती है और ऐसा करना उसकी जिम्मेदारी है और कहा कि जांच के बाद ही कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में कही गई बातें सरकार के संज्ञान में है। अगर जांच के बाद इन्हें सही पाया गया तो इसमें जो कोई भी शामिल होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी, चाहे वह सेवारत हो या सेवानिवृत्त।
नरेंद मोदी की रेवाड़ी रैली में शामिल होने के लिए जनरल सिंह को निशाना बनाए जाने और सेना की रिपोर्ट को राजनीति से प्रेरित बताते हुए तिवारी ने कहा, ``यह बेहद आश्चर्यजनक है कि जब भी संस्थानों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगता है तो आप हमेशा पायेंगे कि भाजपा ऐसे लोगों के बचाव में कूद पड़ती है।''
उन्होंने कहा, ``मैं उम्मीद करता हूं कि इन सभी घटनाओं के पीछे भाजपा का अदृश्य हाथ नहीं है।'' भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा कि जनरल सिंह के खिलाफ आरोप का न केवल समय बल्कि रिपोर्ट की सामग्री पूरी तरह से अजीब और विचित्र लग रहे हैं। उन्होंने कहा, ``यह स्वाभाविक है कि सेवानिवृत्त सैन्य प्रमुख को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह रेवाड़ी रैली में नरेन्द मोदी के समीप बै"s हुए थे।'' लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त राज कादियान ने कहा कि टीएसडी के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और उसकी जांच कराए जाने की आवश्यकता है लेकिन यह कहते हुए रिपोर्ट की सामग्री पर उन्होंने सवाल खड़े किए कि यह जनरल सिंह और मोदी के मंच साझा करने के महज कुछ दिनों के बाद आ रही है। मेजर जनरल ःसेवानिवृत्तः जी डी बख्शी ने भी कादियान की राय को साझा किया। टीएसडी का ग"न मई 2010 में जनरल वी के सिंह के कार्यकाल में किया गया था और इसके अस्तित्व का पता पिछले साल मार्च में उस वक्त चला जब यह आरोप लगाया गया था कि यूनिट ने रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का फोन टैप किया था। यह वाकया सेना प्रमुख की जन्मतिथि के संबंध में विवाद के चरम पर रहने के दौरान का है।
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