मुंबई, चालू वित्त वर्ष में पांच से 5.5 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद जाहिर करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आज कहा कि आर्थिक हालात में सुधार के संकेत दिख रहे हैं और सरकार द्वारा की गई पहल से अर्थव्यवस्था को आ" प्रतिशत की वृद्धि दर प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
भारतीय बैंकों के संघ के प्रमुख समारोह `बैंकॉन 2013' में बैंकों और अर्थशास्त्रियों को संबोधित करते हुए चिंदबरम ने बैंकों से कहा कि वे जानबूझकर चूक करनेवालों से सख्ती से निपटें लेकिन जो अर्थिक नरमी के असर से जूझ रहे हैं उनकी मदद करें।
चिदंबरम ने बैंकों से कहा कि वे फैसला लेने से परहेज न करें और वायदा किया कि सही तरीके से सही मंच के जरिए लिये गए उनके निर्णयों के लिए सरकार उनका पूरा बचाव करेगी भले ही बाद में वह निर्णय गलत हो गया हो। उन्होंने कहा कि मुदास्फीति विशेष तौर पर खाद्य मुदास्फीति सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। अर्थव्यवस्था की स्थिति के संदर्भ में चिदंबरम ने कहा अब हालात सुधारने के संकेत दिख रहे हैं। इसमें तेजी आएगी और अर्थवयवस्था गति पकड़ेगी। इस साल की दूसरी छमाही में सुधार होगा और यह बिल्कुल संभव है कि रिजर्व बैंक और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद या सरकार द्वारा अनुमानित 5 से 5.5 प्रतिशत के बीच की वृद्धि को प्राप्त कर लिया जाए।
आर्थिक वृद्धि की दर 2012-13 में गिर कर 5 प्रतिशत रह गयी। यह एक दशक के न्यूनतम दर है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान वृद्धि 4.4 प्रतिशत थी। दूसरी तिमाही की वृद्धि का आंकड़ा 29 नवंबर को आना है।
चिदंबरम ने बैंकों से कहा कि वे इस मुश्किल स्थिति में उद्योगों की मदद करें। उन्होंने कहा हमें जानबूझकर चूक करने वालों के साथ सख्ती बरतनी चाहिए लेकिन हमें उनकी मदद करनी चाहिए जो वाह्य परिस्थितियों के शिकार हैं।
उन्होंने कहा यह बैंकों और ग्राहकों के एक दूसरे पर भरोसा रखकर साथ मिलकर काम करने का दौर है क्योंकि जब हम इस मुश्किल दौर से निकल आएंगे ... और जब सुधार शुरू हो जाएगा और जब तिमाही दर तिमाही वृद्धि नजर आने लगेगी तब ज्यादातर बैंक अच्छी स्थिति में होंगे, उनकी बैलेंसशीटकी स्थिति अच्छी हो जाएगी।
चिदंबरम ने इस बात पर अफसोस जताया कि विभाग फैसलों पर अक्सर सवाल खड़ा करतें हैं पर बैंकों को "ाsस तथ्यों और हालात पर आधारित फैसलों से परहेज नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा जहां तक सरकार का सवाल है, मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि यदि आप उपलब्ध तथ्यों और हालात पर फैसले लेते हैं ... उचित तरीके से उचित समिति या उचित मंच के जरिए से फैसला करते हैं.. और अपने सर्वश्रेष्" फैसले पर अमल करते हैं तो हम आपका बचाव करेंगे।
मंत्री ने जोर देकर कहा यदि हर फैसला को विशेष मंशा या दुर्भावना से प्रेरति मान कर सवाल खड़ा किया जाए तो कोई कारोबार नहीं चल सकता है और न ही कोई फैसला किया जा हो सकता है ... मुझे लगता है कि यह संबद्ध अधिकारियों और विभागों द्वारा किया गया सबसे खतरनाक फैसला होगा और मैं मानना है कि यह रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कोई फैसला बाद में गलत निकल सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह बेईमानी या दुर्भावनापूर्ण फैसला था।
वृद्धि का हवाला देते हुए चिदंबरम ने कहा कि यह भारत जैसे आकार के देश के के लिए यह बेचारगी है कि वह आ" प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर प्राप्त करने की अपनी संभावनाओं का दोहन नहीं कर पा रहा है।
उन्होंने कहा बचत सकल घरेलू उत्पाद के 30 प्रतिशत से अधिक है, तथा इस समय वृद्धि संबंधी जो पूंजी-उत्पादन अनुपात है .. जो पहल हमने की है उसका फायद हागा और हम उच्च वृद्धि के मार्ग पर वापस आएंगे। उच्च वृद्धि संबंधी गतिविधि 2014 में दिखेगी।
मंहगाई के संबंध में चिदंबरम ने कहा कि मुदास्फीति का प्रबंधन सबसे मुश्किल चुनौती है।
उन्होंने कहा कि थोकमूल्य सूचकांक ःडब्ल्यूपीआईः आधारित मंहगाई दर जो 2009 में 1.9 प्रतिशत थी, बढ़कर सात प्रतिशत हो गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सीपीआईः पर आधारित खुदरा मुदास्फीति 10 प्रतिशत से उढपर और खाद्य मुदास्फीति 12 प्रतिशत से उढपर है।
उन्होंने कहा हाल में हुई तेजी से पहले हम इस साल यादातर समय थोकमूल्य सूचकांक को नियंत्रित करने में कामयाब रहे ... हम खुदरा मूल्य सूचकांक आधारित मुदास्फीति को नियंत्रित नहीं कर पाए क्योंकि इसमें बढ़ोतरी खाद्य उत्पादों विशेष तौर पर फल, सब्जी, मीट और अन्य चीजों के कारण हुई।
चिदंबरम ने कहा कि मौदिक नीति का खाद्य कीमत पर असर नहीं हुआ। उन्ढाने कहा खाद्य मुदास्फीति पर लगाम लगाने का एक ही तरीका है आपूर्ति बढ़ाना ... आपूर्ति बढ़ाने के लिए ज्यादा निवेश, ज्यादा उत्पादन, ज्यादा वितरण की जरूरत है .. बेहतर लाजिस्टिक्स की जरूरत है और उत्पादों को भंडार तक पहुंचाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा हमारे सामने चुनौती है,उस चुनौती पर ध्यान देना होगा, उसे स्वीकार करना होगा तथाउसका सामना करने के लिएः आवश्यक पहल करनी होगी जिसे हम नीतिगत पहल कहते हैं,इसमें मौदिक नीति भी शामिल है।
राजकोषीय घाटे का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद को 4.8 प्रतिशत तक सीमित रखने के लिए जो भी आवश्यक होगा हम करेंगे। यदि हम इसका उल्लंघन करते हैं तो उसमें हमारे लिए बड़ा जोखिम है। हम इसका अतिक्रमण नहीं करेंगे,राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखेंगे।
चालू खाते के घाटे के संबंध में मंत्री ने कहा पिछले साल हमारा चालू खाते का घाटा अप्रत्याशित रूप से 88 अरब डालर था। यदि हम इसके लिए पूरी तरह से धन की व्यवस्था कर सके और साथ ही अपने मुदाभंडार में कुछ अतिरिक्त राशि जोड़ सके। हए कए छोटा चमत्कार ही था।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष में शुरूआत में चालू खाते के घाटे को घटाकर 70 अरब डालर करने का प्रस्ताव किया था जिसे बाद में इस लक्ष्य को और सुधार कर अब 60 अरब डालर कर दिया गया है।
मंत्री ने कहा दो दिन पहले आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजनः ने कहा कि चालू खाते के घाटे को 56 अरब डालर या इससे नीचे रखा जा सकता है। मैं बेहतर करने की कोशिश कर रहा हूं और चालू खाते के घाटे को 56 अरब डालर के नीचे रखने की कोशिश कर रहा हूं।
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