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शहरी क्षेत्रों में निर्माण परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को सुव्‍यवस्थित करने पर संबंधित मंत्रालय सहमत

ABSLM-10/02/2015 

श्री वेंकैया नायडू ने 30 दिन में मंजूरी देने का लक्ष्‍य तय करने का सुझाव दिया
शहरी क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से सरकार ने आज एक अहम फैसला किया। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में निर्माण परियोजनाओं का काम शुरू करने के लिए तरह-तरह की आवश्‍यक मंजूरियों एवं अनापत्ति प्रमाणपत्रों की संख्‍या में खासी कटौती की जायेगी। सात संबंधित मंत्रालयों के मंत्रियों एवं सचिवों ने आज एक बैठक में 'मंजूरी देने की प्रक्रिया की मौजूदा प्रणाली एवं आगे की रूपरेखा' पर विचार-विमर्श किया। यह बैठक शहरी विकास एवं आवास और शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडू ने बुलाई थी। आवेदन करने की तिथि से लेकर 30 दिन के भीतर सभी मंजूरियां सुनिश्चित करने संबंधी श्री नायडू के सुझाव पर ही बैठक में विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।
श्री नायडू के अलावा नागरिक उड्डयन मंत्री श्री पी. अशोक गजपति राजू एवं पर्यावरण व वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर और शहरी विकास, एचयूपीए, नागरिक उड्डयन, संस्‍कृति, रक्षा, पर्यावरण व वन तथा जलवायु परिवर्तन और उपभोक्‍ता मामलों के सचिवों ने भी इस विचार-विमर्श में हिस्‍सा लिया। यह विचार-विमर्श एक घंटे से भी ज्‍यादा समय तक चला। 
सचिव (एचयूपीए) डॉ. नंदिता चटर्जी ने मंत्रियों को सूचित किया कि मौजूदा समय में केन्‍द्र एवं राज्‍य सरकारों से 30 से लेकर 50 मंजूरियां तक लेने की जरूरत पड़ती है, जिससे निर्माण परियोजनाओं को स्‍वीकृति देने में औसतन 90 दिन से लेकर 600 दिन तक लग जाते हैं। उन्‍होंने कहा कि मंजूरी प्रक्रिया के पैमानों, लागत तथा इसमें लगने वाले समय को ध्‍यान में रखते हुए भारत को कुल 185 देशों में बेहद नीचे 182 रैंकिंग दी गई है, जिससे देश में निवेश पर बहुत ही प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 
श्री प्रकाश जावडेकर ने इस सुझाव पर अपनी सहमति जताई कि वन एवं पर्यावरण से जुड़े ज्‍यादातर नियमों को भवन निर्माण से संबंधित उप-कानूनों में शामिल किया जा सकता है, ताकि संबंधित शहरी स्‍थानीय निकायों द्वारा इनका अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्‍होंने कहा कि उनका मंत्रालय जल्‍द ही प्‍लॉट के भिन्‍न-भिन्‍न आकारों के लिए अलग-अलग दिशा- निर्देश जारी करेगा, जिन्‍हें विकास नियंत्रण नियमों में भी शामिल किया जा सकता है। श्री जावडेकर ने सूचित किया कि तटीय क्षेत्र के नियमों से संबंधित मुद्दों को भी जल्‍द सुलझा लिया जायेगा। उन्‍होंने यह भी बताया कि पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले 639 क्षेत्रों (जोन) की वास्‍तविक सीमाओं का नक्‍शा तैयार करने के काम में तेजी लाई जायेगी, ताकि इस बारे में कोई संशय न रहे और त्‍वरित मंजूरियां देना संभव हो सके। श्री जावडेकर ने आश्‍वासन दिया कि गरीबों हेतु मकान बनाने के लिए जमीन ढूंढ़ने के वक्‍त पहाड़ी क्षेत्रों की जो समस्‍या सामने आती है उस पर भी गौर किया जायेगा। 
नागरिक उड्डयन मंत्री श्री अशोक गजपति राजू ने सहमति जताते हुए कहा कि उनका मंत्रालय सभी हवाई अड्डों के 'फनल जोन' में निर्माण के वास्‍ते लगाई गई ऊंचाई संबंधी प्रतिबंधों से जुड़ी सूचनायें एवं आवश्‍यक नक्‍शे संबंधित शहरी स्‍थानीय निकायों को उपलब्‍ध करायेगा, जिससे कि वे आवश्‍यक कदम उठा सकें।
संस्‍कृति विभाग में सचिव ने सूचित किया कि स्‍मारकों के निकट निर्माण पर लगाये गये मौजूदा प्रतिबंधों पर नये सिरे से विचार किया जा रहा है और हर स्‍थल के नक्‍शों को जल्‍द ही प्रकाशित किया जायेगा। यह कदम शहरी स्‍थानीय निकायों के हित में उठाया जा रहा है ताकि जल्‍द मंजूरी देना संभव हो सके। 
सचिव (उपभोक्‍ता मामले) ने कहा कि राष्‍ट्रीय भवन निर्माण संहिता-2015 को इसी साल सितम्‍बर तक अंतिम रूप दे दिया जायेगा। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य निर्माण परियोजनाओं के लिए एकल खिड़की मंजूरी को सुनिश्चित करना है। 
श्री वेंकैया नायडू ने कहा कि जहां तक संभव हो सके, सरकार को एक ऐसी व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करनी चाहिए जिसके तहत न्‍यूनतम मंजूरियां ही लेने की जरूरत पड़े और ये मंजूरियां भी अधिकतम 30 दिनों में ही ऑनलाइन मिल जायें।

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