ABSLM -18/02/2015
श्री गहलोत ने समयबद्ध तरीके से हाथ से मैला ढोने की कुप्रथा समाप्त करने पर बल दिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 02 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की थी, जिसके तहत अन्य बातों के अलावा हाथ से मैला ढोने की कुप्रथा को समाप्त करने और सीवरों व सेप्टिक टैंकों की मशीन से सफाई पर भी बल दिया गया है। "हाथ से मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013" (एमएस अधिनियम-2013) के जरिए भी हाथ से मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन, अस्वस्थकर व गंधे शौचालयों और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक ढंग से सफाई पर प्रतिबंध लगाया गया है।
"एमएस अधिनियम, 2013" के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से हाथ से मैला ढोने की कुप्रथा के पूर्ण उन्मूलन के संबंध में राज्य मंत्रियों का एक सम्मेलन आज यहां आयोजित किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत ने की। सम्मेलन में 9 राज्यों- छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और दिल्ली के संबंधित मंत्रियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में 21 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
सम्मेलन के दौरान संबंधित राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों और केन्द्रीय मंत्रालयों द्वारा एमएस अधिनियम-2013 के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। नौ राज्यों के मंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों में इस अधिनियम के क्रियान्वयन पर कार्रवाइयों का लेखा-जोखा पेश किया और साथ में कई सुझाव भी दिए।
इस मौके पर श्री गहलोत ने कहा कि हाथ से मैला ढोने की कुप्रथा को समयबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिनियम द्वारा व्यापक रूप से परिभाषित शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्वस्थकर व गंदे शौचालयों के सर्वेक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस कार्य को तत्काल पूरा करने की जरूरत है। इन शौचालयों से मैला ढोने वाले कर्मियों की पहचान की जानी चाहिए और वैकल्पिक व्यवसाय के साथ उन्हें पुनर्वासित किया जाना चाहिए। श्री गहलोत ने इस बात का भी खुलासा किया कि कई राज्यों में मैला ढोने वाले कर्मियों और अस्वस्थकर शौचालयों का सर्वेक्षण कार्य सही ढंग से नहीं हो रहा है। संबंधित एजेंसियों को एमएस अधिनियम के दिशा-निर्देशों के अनुरूप घर-घर जाकर ताजा सर्वेक्षण करने की जरूरत है।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत भी सभी को शौचालय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक विशेष मुहिम चलाने पर जोर दिया गया है।
श्री गहलोत ने बताया कि सरकार ने 1359 मैला ढोने वाले कर्मियों को एकमुश्त 40,000 रूपये की सहायता राशि दी गई है और यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में डाल दी गई है। यह सहायता मंत्रालय ने राज्य सरकारों द्वारा राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त व विकास निगम को दी गई जानकारी के आधार पर दी है। उन्होंने राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को अब तक चिन्हित किए गए मैला ढोने वाले कर्मियों के व्यापक पुनर्वास के लिए प्रस्ताव शीघ्र पेश करने का सुझाव दिया, ताकि मंत्रालय एसआरएमएस के तहत राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त व विकास निगम के जरिए राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को पुनर्वास पैकेज मंजूर कर सके। उन्होंने खतरनाक ढंग से सीवरों और सेप्टिक टैंकों की सफाई तत्काल बंद करने पर भी जोर दिया।
सम्मेलन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त व विकास निगम के अध्यक्ष, सामाजिक न्याय और अधिकारिता सचिव श्रीमती अनिता अग्निहोत्री व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

निवेदन :- अगर आपको लगता है की ये लेख किसी के लिए उपयोगी हो सकता है तो आप निसंकोच इसे अपने मित्रो को प्रेषित कर सकते है