सरसा, 25 फरवरी। ऑटो व्यवसायियों और मिस्त्रियों ने ऑटो मार्केट के प्रधान और नगर परिषद के खिलाफ जमकर रोष प्रकट किया। उपस्थितजनों को प्रधान रोशन लाल डांग को हटाने की मांग करते हुए कहा कि प्रधान पद पर रहते हुए श्री डांग ने मिस्त्रियों के हित में कोई कार्य न कर केवल प्रोपर्टी डीलिंग का कार्य किया है, इसलिए शीघ्र ही नई कार्यकारिणी का चुनाव किया जाए। विश्वकर्मा मंदिर में आयोजित बैठक में उपस्थित लोगों ने आरोप लगाया कि 30 साल से ऑटो मार्केट का विकास न होने का मुख्य कारण राजनीतिक खींचतान और पात्र व्यक्तियों को प्लाटों का अलाटमेंट न करना रहा है। बैठक में मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि नगर परिषद के प्रधान के पास यह पूर्ण अधिकार है कि वह ट्रक यूनियन के पास निर्मित 140 दुकानों को नगर परिषद में रेजुलेशन पास करके मिस्त्रियों और ऑटो व्यवसायियों को किराये पर दे सकते हैं, परंतु विकास कार्यों की इच्छाशक्ति के अभाव में नगर परिषद के पदाधिकारी कोई न कोई बहाना ढूंढकर शहर की प्रगति का मार्ग अवरुद्ध किए हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले नगर परिषद ने 32 दुकानें इसी प्रकार रेजुलेशन पास कर किराये पर दी हैं, परंतु अब इस बारे में राजनीतिक कारणों के चलते टालमटोल की जा रही है। बैठक में कहा गया कि यदि ये दुकानें किराये पर दी जाती हैं तो इससे न केवल नगर परिषद की आय में वृद्धि होगी, जिससे ऑटो मार्केट का सुधार होगा, बल्कि शहर के अनेक हिस्सों में खोखे और महंगे किराये पर बैठे मिस्त्रियों को लाभ होगा। उन्होंने नगर परिषद के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि ये लोग ऑटो मार्केट के विकास की अनदेखी के नए-नए बहाने ढूंढ रहे हैं। नगर परिषद को ट्रक यूनियन से 97 लाख और 250 प्लाट होल्डरों से 90 लाख रुपये की राशि प्राप्ति हुई थी, जबकि नगर परिषद का अनुमान केवल मात्र 21 लाख रुपये था। बैठक में उपस्थित पार्षद अंग्रेज बठला व विजय बठला ने कहा कि कांडा बंधुओं ने अपने निजी कोष से लाखों रुपये खर्च करके ऑटो मार्केट के विकास में रुचि दिखाई थी, परंतु विकास विरोधी सोच रखने वालों ने ऑटो मार्केट को एक कामधेनु गाय के रूप में इस्तेमाल किया और अपने स्वार्थ सिद्धी में लगे रहे। अंग्रेज बठला ने कहा कि यदि 140 बनी हुई दुकानें मिस्त्रियों को दे दी जाती है तो शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पर भी काफी हद तक सुधार हो सकता है। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने उपायुक्त कार्यालय की एलएफए ब्रांचके एक अधिकारी का भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण भी ऑटो मार्केट का विकास नहीं हो पाया।
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