abslm 1/07/2021 एस• के• मित्तल सफीदों :
प्रदेश की एमडीयू, सीआरएसयू, सीडीएलयू व केयू के बीएड पाठ्यक्रम में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद के गुरू स्वामी विवेकानंद को बताए जाने पर सुप्रसिद्ध आर्य समाजी नेता एवं पूर्व मंत्री बचन सिंह आर्य ने अपना गहरा विरोध जाहिर किया है और सरकार से पाठ्यक्रम की गलतियों को दुरूस्त करने व लेखक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। बचन सिंह आर्य ने कहा कि स्वामी दयानंद के गुरु स्वामी विरजानंद थे। स्वामी दयानंद आर्यवर्त भारत के सूर्य थे। आजादी की लड़ाई में स्वामी दयानंद और उनके अनयायियों का विशेष योगदान रहा है। स्वामी दयानंद ने स्वराज की आवाज उठाई थी और 80 प्रतिशत आर्य समाजियों ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। उनके शिष्य स्वामी श्रद्धानंद ने देश में गुरुकुल पद्धति को बढ़ावा दिया। डीएवी के संस्थापक और उनके शिष्य महात्मा हंसराज ने देश में शिक्षण संस्थानों का विस्तार किया। लाला लाजपत राय, स्वामी आनंदबोध सरस्वती, शहीद भगत सिंह व पंडित रामप्रसाद बिस्मिल समेत उनके अनन्य शिष्य थे। वर्तमान दौर स्व. महाशय धर्मपाल एमडीएच वाले व स्वामी रामदेव ने पूरे विश्व में ओम की पताका फहराई। ऋषि दयानंद ने सती प्रथा, बाल विवाह, विधवा विवाह, जाति-पाती व छुआछूत जैसी अनेक कुरीतियों को मिटाने का कार्य किया था। चारों वेदों, उपनिषदों, दर्शनों के वे विद्वान पंडित थे। उन्होंने चारों वेदों ऋग्वेद, यर्जुेवेद, सामवेद व अथर्वेद का संस्कृत से हिंदी में शुद्ध रूप से सरलार्थ किया था ताकि विश्व के लोग वेदों को आसानी से पढ़ सकें।


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