abslm 12/10/2021 एस• के• मित्तल :

कोविड-19 त्रासदी में संक्रमित हुए मरीजों के इलाज के खर्च का क्लेम देने को लेकर बीमा कंपनियां बहानेबाजी करके अपने हाथ खड़े करने लग गई है तथा बीमा खरीदने वाले उपभोक्ता अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। एक बीमा कंपनी की तरफ से एक महिला कोविड रोगी के उपचार खर्च क्लेम मामले में कहा गया है कि कंपनी ने बीमित महिला के उपचार के रिकार्ड में यह पाया है कि वह इतनी गंभीर नही थी कि उसे अस्पताल में दाखिल होना पड़े इसलिए वह उपचार के खर्च की रिंबर्समैंट की हकदार नही है। पुरानी अनाज मण्डी सफीदों की महिला रोगी बबीता के पति महाबीर प्रसाद का कहना है कि उन्होंने अपनी पत्नी के लिए स्टार हैल्थ बीमा कंपनी की मैडीक्लेम पालिसी खरीदी थी जो 25 फरवरी 2021 से 24 फरवरी 2022 तक वैध है। उन्होने कहा कि उन्होने बबीता के उपचार पर 63956 रूपए खर्च किए और बीत गई 10 जून को रिंबर्समैंट का क्लेम दाखिल किया तो कंपनी ने इसे रद्द करने का पत्र बीस दिन के बाद भेज दिया। अब उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से 2 लाख हर्जाने के साथ 2.64 लाख रूपए का नोटिस कंपनी के चेन्नई कार्यालय व उसके पानीपत कार्यालय तथा यहां के बीमा एजैंट को भेेजा है।

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बीमा कंपनी ने केंद्रिय स्वास्थ्य मंत्रालय के किसी सर्कुलर के हवाले से ऐसे क्लेम को खारिज किया है। महाबीर प्रसाद ने बताया कि उनकी पत्नि बबीता की बीत गई 22 अप्रैल को खांसी व छाती में सक्रमण की गंभीर हुई तो डाक्टरों के परामर्श पर उसका सीटी व चैस्ट टैस्ट पानीपत के एक डायगनोस्टिक सैंटर मे कराए गए और पानीपत के किसी अस्पताल में बिस्तर उपलब्ध ना होने के कारण कोशिश कर जींद के बालाजी अस्पताल मे एक बिस्तर की व्यवस्था कर उसे वहां दाखिल कराया गया। 24 अप्रैल को उसे कोविड संक्रमित होने की पुष्टि हुई। वहीं उपचार दिलाया गया और डाक्टरों के परामर्श पर अगले चौदह दिन के लिए घर में क्वोरैंटाईन किया गया तब जाकर वह ठीक हुई। महाबीर प्रसाद का कहना है कि बीमा कंपनी कहती है रोगी की स्थिति गंभीर नहीं थी। सीटी स्कैन में मरीज के फेफडे 17-25 संक्रमित पाए गए थे और यह स्थिति अत्यंत गंभीर थी। इतनी मात्रा में फेफेड संक्रमित मरीज का इलाज घर पर क्वोरैंटाईन करके इलाज संभव नहीं था। उन्होंने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि जिन लोगों ने लापरवाही बरती या गंभीर स्थिति में मरीज को घर में ही क्वोरैंटाईन कर दिया था उनमें से काफी लोग काल का ग्रास बन गए थे। महाबीर प्रसाद ने साफ किया कि अगर नोटिस पर कंपनी कोई गौर नहीं करती है तो वे इस मामले को अदालत में लेकर जाएंगे।
फोटो कैप्शन 4.: हेल्थ इंश्योरेंस की प्रतीकात्मक फोटो
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