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स्वर्ण आभूषण पर ऋण देने के नियम गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए और सख्त



सोने की मांग पर शिकंजा और कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने सोने के जेवरात को गिरवी रखकर दिए जाने वाले रिण के नियम को सख्त बना दिये हैं। गिरवी रखे जाने स्वर्ण आभूषण का मूल्यांकन पिछले 30 दिन के 22 कैरेट के सोने की औसत कीमत के अनुसार किया जाएगा। यह कीमत बांबे सर्राफा संघ ःबीबीएः की कीमतों पर आधारित होगी। आरबीआई ने एक अधिसूचना में कहा ``मूल्यांकन के मानकीकरण और इसे रिण लेनेवालों के लिए अधिक पारदर्शी बनाने हेतु गिरवी रखे जाने वाले स्वर्ण आभूषण का मूल्यांकन बांबे बुलियन एसोसिएशन द्वारा जारी पिछले 30 दिन के 22 कैरेट सोने के बंद मूल्य के औसत के आधार पर किया जाएगा।'' फिलहाल ऐसे आकलन के लिए कोई मानक तय नहीं है। आरबीआई ने कहा कि गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को रिण के लिए स्वर्ण आभूषण गिरवरी रखते समय अपने लेटर हेड पर ग्राहक को साने की शुद्धता और वजन का प्रमाण पत्र देना होगा।केंदीय बैंक ने कहा कि यदि सोना की शुद्धता 22 कैरेट नहीं है तो एनबीएफसी को 22 कैरेट में तब्दील करना होगा और गिरवी रखे जाने वाले जेवरात का सही वजन बताना होगा। दूसरे शब्दों में कम शुद्ध सोने वाले जेवरात का आकलन उसी अनुपात में होना चाहिए। आरबीआई ने कहा कि ग्राहक को सोने के जेवरात के मूल्य के 60 प्रतिशत के बराबर रिण दिया जा सकता है। रिजर्व बैंक ने कहा कि सोने को गिरवी रखकर रिण देने वाली एनबीएफसी को पांच लाख रुपए से अधिक के सभी लेन-देन पर ग्राहक के पैन कार्ड की प्रति लेनी होगी। एक लाख रुपए और इससे अधिक का रिण सिर्फ चेक के जरिए दिया जाना चाहिए।


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