जाने माने फिल्म अभिनेता अमोल पालेकर ने शुक्रवार को हैदराबाद में कहा कि बच्चों द्वारा फिल्मों में अभिनय करने को आय अर्जित करने के साधन के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए, यह उनके लिए एक अभिरुचि से अधिक कुछ नहीं होना चाहिए।
भारत के अंतर्राष्ट्रीय बाल फिल्म समारोह (आईसीएफएफआई) के मुख्य परिसर में स्थित आईएमएएक्स थियेटर में एक ओपन फोरम (मुक्त मंच) पर उन्होंने कहा कि बड़ों की तुलना में बच्चे अधिक सक्रिय होते हैं। लेकिन उन्हें अधिकाधिक फिल्मों में अभिनय के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
आन्ध्र प्रदेश बाल फिल्म समिति के अध्यक्ष एम वेद कुमार ने कहा कि फिल्म बनाना किसी उद्योग से कम नहीं है, इसलिए स्वाभाविक है कि यदि बाल कलाकार धन लेकर फिल्मों में काम करते हैं तो उन्हें श्रमिक समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सिर्फ खाली समय में फिल्मों में हिस्सा लेना चाहिए।
भारतीय बाल फिल्म समिति के सीईओ श्रवण कुमार ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा बनाए गए नियमों और विनियमों का खुलासा किया।
अन्य विशेषज्ञ असम की अभिनेत्री और कार्यकत्री बोबीता शर्मा ने अपने वक्त्व्य में मीडिया शो की अद्तन प्रवृतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि टीवी शो के लिए बच्चों का भावनात्मक और शारीरिक शोषण नहीं किया जाना चाहिए। ओपन फोरम का संचालन हैदराबाद की उमा मुगल ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और प्रतिनिधियों और फिल्मी हस्तियों ने हिस्सा लिया।
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