ABSLM 10/12/2021 एस• के• मित्तल
जींद, श्रीमद्भगवद् गीता पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है। इसका संदेश समाज को जीना सिखाता है। महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने गीता का सन्देश अर्जुन को सुनाया था। श्रीमद्भगवद् गीता में एकेश्वरवाद, कर्म योग, ज्ञानयोग, भक्ति योग की बहुत सुन्दर ढंग से व्याख्या की गई है। यह विचार राजेश स्वरूप शास्त्री ने गीता जयंती पाठ की तैयारियों को लेकर स्थानीय रंगशाला में आयोजित होने वाले गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर व्यक्त किए।
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उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश आज भी हमारे जीवन के रहस्यों को उजागर करते हैं, आज का इंसान जीवन की मोह माया में पड़ा रहता है। भगवत गीता का ज्ञान ही हमें इस संसारिक मोह-माया के बंधन से आजाद कर सकता है। गीता का ज्ञान ही स्वयं को और सर्वशक्तिशाली ईश्वर को पहचानने का अवसर देता है। श्रीमद्भगवद्गीता वर्तमान में धर्म से ज्यादा जीवन के प्रति अपने दार्शनिक दृष्टिकोण को लेकर भारत में ही नहीं विदेशों में भी लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर रही है।
फोटो कैप्शन 8.: राजेश स्वरूप शास्त्री
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