abslm 11/3/2024 एस• के• मित्तल
सफीदों, जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के सुशिष्य स्वामी मुकुंदानंद महाराज नगर के फयूजन होटल में पहुंचे। जहां पर जगद्गुरु शंकराचार्य सम्मान समिति के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने उनका जोरदार अभिनंदन किया। अपने आशिर्वचन में स्वामी मुकुंदानंद महाराज कहा कि भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण का जीवन चरित्र हमेशा प्रेरित करने वाला है और उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। भगवान श्री रामचंद्र को यह पता होते हुए भी कि कल उनका राज्याभिषेक होगा वह अधिक खुश नहीं होते। फिर अगले दिन उन्हें पता चलता है कि उन्हें 14 वर्ष के लिए वन जाना है तो भी वे अधिक परेशान भी नहीं होते हैं। सारा राज्य ही नहीं बल्कि उनके पिता राजा दशरथ भी उनके पक्ष में थे सिर्फ माता कैकई ही उनके खिलाफ थी। श्रीराम चाहते तो वे राज्य प्राप्त कर सकते थे और उनके लिए यह कोई कठिन कार्य नहीं था लेकिन अपनी माता कैकेई की इच्छा व पिता के वायदे को पूरा करने के लिए राज्य और कुर्सी को त्यागकर 14 वर्ष के लिए वन को चले गए। लेकिन के दौर में सबकुछ उलट है। आज के समय में कुर्सी का अधिक महत्व हो गया है और कोई कुर्सी को नहीं छोड़ना चाहता। हालत यह है कि छोटे-छोटे पदों के लिए भी भारी मारामारी है तथा समीकरण बैठाए जाते हैं। शास्त्र कहते हैं कि सभी के कर्म एक समान नहीं होते। सबके कर्म अलग-अलग हैं।


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